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नूरपुर हादसा: जिगर के टुकड़े दे गए जिंदगी भर के जख्म, गम में खाना छोड़ा और...

Wed, 11 Apr 2018 02:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नूरपुर/राजा का तालाब
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kangra accident
जिगर के टुकड़ों को खो चुके ये माता-पिता बेसुध हो गए हैं। खाना भी छोड़ दिया है। बच्चों को याद करते ही आंसुओं का सैलाब बह रहा है। हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के नूरपुर का स्कूल बस हादसा इन परिवारों को उम्र भर के जख्म दे गया।
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हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के नूरपुर के करीब आधा दर्जन गांव मातम में डूबे हैं। ठेहड़, खुआड़ा, सुल्याली, फंगोता, हारगतला और लखनाहट आदि गांवों में किसी के घर में चूल्हा नहीं जला है। इन गांवों में किसी भी परिवार के लोगों ने अन्न ग्रहण नहीं किया। मासूम बच्चों की मौत के गम में हर किसी की आंख नम थी। ठेहड़ पंचायत की प्रधान इंदुबाला ने बताया कि गांवों में मातम पसरा है। कई मां-बाप अपने लाडलों को खो चुके हैं। गमगीन गांवों के परिवारों में चूल्हा तक नहीं जला है। मातम में डूबे लोग अन्न ग्रहण नहीं कर रहे हैं।
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एक साथ जलीं चार भाई-बहनों की चिताएं- रितेश महाजन, खुबाड़ा (कांगड़ा)। चेली बस हादसा खुबाड़ा गांव के दो सगे भाइयों के लिए उम्र भर का जख्म दे गया। परिवार के चार भाई-बहनों की चिताएं एक साथ जलीं। यह मंजर देखकर हर किसी की आंख नम थी। खुबाड़ा गांव के सगे भाई राजेश जम्वाल और नरेश सिंह के दो बेटे और दो बेटियां हादसे का शिकार बन गईं। दोनों भाई बद्दी में निजी कंपनियों में नौकरी करते हैं। हादसे में नरेश सिंह ने 11 वर्षीय बेटी दीक्षा और आठ साल के बेटे नैतिक को खोया। उनके भाई राजेश का 10 साल का बेटा भविष्य और 13 साल की बेटी पलक हादसे का शिकार हो गई।

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सात फरवरी को हुई थी शादी- ठेहड़ (नूरपुर)। शिक्षक राजेश कुमार के दादा रामदीता और दादी कुजोदवी ने कहा कि वह परिवार का एकमात्र सहारा था, वह भी इस दुनिया को छोड़कर चला गया। शिक्षक राजेश की इसी साल सात फरवरी को शादी हुई थी। बीएड करने के बाद मलकवाल के निजी स्कूल में पढ़ा रहा था। हार गतला गांव के राजेश के पिता हंसराज और भाई मजदूरी करते हैं। परिवार में वही एक पढ़ा-लिखा था। इस कारण परिवार के हर सदस्य को आस थी कि वह नौकरी करेगा और परिवार का सहारा बनेगा। उन्हें क्या पता था कि चेली हादसा उनसे यह सहारा छीन लेगा। राजेश की पत्नी पर भी मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। शादी के दो माह बाद ही उसका सुहाग छिन गया।
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शादी की खरीदारी कर लौट रही थी पूनम-  खुबाड़ा (कांगड़ा)। चेली हादसे में खुबाड़ा गांव की पूनम पठानिया (21) की भी मौत हो गई। पूनम की शादी 12 मई को थी। पूनम शादी की खरीदारी कर मलकवाल से खुबाड़ा लौट रही थी। लगभग तीन किलोमीटर का सफर था। तभी मलकवाल की ओर से स्कूल बस आई। उसने लिफ्ट मांगी और उस में चढ़ गई। पूनम के साथ उसकी बुआ की बेटी शगुन (15) पुत्री गुलशन कुमार निवासी कनौड़, तहसील चुवाड़ी जिला चंबा भी साथ थी। हादसे में शगुन की भी मौत हो गई। वह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टूड़ी में दसवीं कक्षा की छात्रा थी। 
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... अब किसे राखी बांधेगी सिमरन- खुबाड़ा गांव में नरेश और राजेश के घर से चार बच्चों की चिताएं एकसाथ उठीं तो बच्चों की माताएं किरण और कुसुम बेटी सिमरन को गले लगाकर यही कह रही थीं, अब सिमरन किसे राखी बांधेगी और किसके साथ खेलेगी। सिमरन नरेश सिंह की बेटी है। उसने इस बार दसवीं कक्षा के परीक्षाएं दी हैं। इस कारण वह घर पर ही थी।
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तू भूखा होगा... मैं तुझे खाना भी नहीं दे पाई- आंगन से बच्चे की अर्थी ले जाते वक्त किरण अपने जिगर के टुकड़े को गले लगाकर फफक-फफक कर रो रही थी। किरण रो-रो कर कह रही थी कि हाय मेरे जिगर के टुकड़े... तू कहां चला गया। इस वक्त तो तूं मुझको खाना खाने के लिए बोलता था... तू भूखा होगा... मैं तो तुझे खाना भी नहीं दे पाई। कल तो मैं तेरे लिए खाना बनाकर बैठी थी। खाने के लिए आया क्यों नहीं मेरे लाल।

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दो दिन ही स्कूल जा पाया परनेश- खुबाड़ा गांव में दुकान चलाने वाले रघुनाथ ने हादसे में चार साल का बेटा खोया है। परनेश (4) ने इसी साल स्कूल में दाखिला लिया था, लेकिन दो दिन ही स्कूल जा सका। दूसरे दिन ही स्कूल बस खाई में गिर गई और परनेश हादसे का शिकार हो गया। रघुनाथ की एक और छोटी बेटी है।

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स्वरूप धीमान, गतला (खुबाड़ा)। उठ बच्चा स्कूल जाना है... बार-बार यही शब्द बोलकर छह वर्षीय रिया की माता फूट-फूट कर रो रही थी। लगभग 13 साल बाद आंगन में आई लक्ष्मी चेली बस हादसे का ग्रास बन गई। रघुवीर सिंह और उनकी पत्नी को बड़ी मन्नतों के बाद बेटी हुई थी। छह साल दोनों ने बड़े लाड-प्यार से उसे पाला, लेकिन बस हादसे ने उनकी गोद फिर सूनी कर दी। छह वर्षीय रिया का शव घर के आंगन में था तो मां बार-बार एक ही बात बोल रही थी कि उठ बच्चा स्कूल जाना है। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों में रिया की मां के दर्द बयां हो रहा था। रिया की चिता को उसके चचेरे भाई शिवम ने मुखाग्नि दी। 

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... हमारे जाने की उम्र में चले गए बच्चे- मुनीष महाजन, ठेहड़ (नूरपुर)। ... हमारे जाने की उम्र में बच्चे चले गए। अभी तो इन्होंने दुनिया भी नहीं देखी थी। ठेहड़ गांव के एक ही परिवार के दो सगे भाइयों के तीन बच्चे हादसे का शिकार हो गए। मनोज पठानिया की दस साल की बेटी सारिका, राजेश पठानिया की सात साल की बेटी दिव्या और चार साल का सुनीष पठानिया एकसाथ दफनाए गए। मनोज की दस साल की बेटी अवनी पठानकोट के निजी अस्पताल में भर्ती है। सारिका, दिव्या और सुनीष के दादा पूर्ण चंद और दादी चांद रानी फूट-फूटकर रो रहे थे। तीनों बच्चों के माता-पिता बेसुध थे। तीनों बच्चों को एक ही जगह दफनाया गया।

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खोया इकलौता लाल- ठेहड़ (नूरपुर)। तरुण उठ बेटा, क्यों सो गया है तू। मां रजनी अपने इकलौते लाल को बार-बार उठाने के लिए यही बोल रही थी। ठेहड़ पंचायत के पंगोता गांव के सुधीर शर्मा और रजनी देवी ने चेली बस हादसे में इकलौता बेटा खोया है। 12 साल का तरुण कौशल सातवीं कक्षा का छात्र था। अपने मां-बाप के इकलौता बेटा होने के कारण परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सुधीर शर्मा बिजली का काम करता है।
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दो बेटियां छोड़ गई नरेश कुमारी- हादसे में लखनाहड़ गांव की शिक्षिका नरेश कुमारी की भी मौत हो गई। वह अपने पीछे सात साल की बेटी मुस्कान और तीन साल की पीहू को छोड़ गई। नरेश का पति सेना में कार्यरत है। हादसे की सूचना मिलने के बाद वह देर शाम को नूरपुर पहुंचे।
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