मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल आपको अंधा भी बना सकता है। आधुनिकता के दौर में आंखों को पलभर का आराम न मिलना अब बच्चों और युवाओं को बीमारी देने लगा है। मोबाइल फोन पर जब से वाट्स एप्प और फेसबुक जैसे साफ्टवेयर आए हैं यह लोगों के जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। भले ही इनसे लोग खुद को अपडेट रखते हों लेकिन इस पर जरूरत से ज्यादा समय गुजारना घातक बन गया है।
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नेत्र विशेषज्ञों का बड़ा खुलासा, आंखों की रोशनी छीन सकता है मोबाइल
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इनके लगातार इस्तेमाल से बच्चों के मस्तिष्क, आंखों, त्वचा और सेहत पर काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। डॉक्टर कहते हैं स्मार्ट फोन की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारी आंखों के लिए नुकसानदायक है। आंख के पिछले हिस्से के लिए यह खतरनाक होती है। इससे बच्चों की आंखों के झपकने की क्षमता प्रभावित होती है और आंखों में सूखेपन जैसी समस्या होती है। डाक्टरी भाषा में इसे कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहा जाता है।
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मोबाइल फोन की ब्राइटनेस और घंटो इसे नजदीक से देखते रहने के अलावा इससे निकलने वाली रेडिएशन आंखों और दिमाग के लिए खतरनाक है। विशेषज्ञों के मुताबिक 25 साल से कम उम्र के युवा दिन में 32 बार फोन का इस्तेमाल करते हैं और लगातार फोन को देखते रहने से दिन के औसतन सात घंटे फोन में गुजार देते हैं। फोन की ब्राइटनेस पर ध्यान न देते हुए अपनी आंखों को खराब कर लेते हैं।
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विशेषज्ञों ने बताया कि 50 से 60 फीसदी लोग घरों में टीवी देखते हैं और बाकी बचे लोग ऑफिस तथा सड़क पर चलते हुए इन गेजेट्स का इस्तेमाल करते हैं। वहीं जो लोग मनोरंजन के लिए चार से पांच घंटे तक इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन को लगातार देखते हैं, उन बच्चों की आंखों में काफी बुरा प्रभाव पड़ता है।
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किरणें बेहद हानिकारक- चिकित्सकों के मुताबिक स्मार्ट फोन पर लगातार देखते रहने से उससे निकलने वाली किरणें जो नीली बैंगनी रंग की होती हैं बेहद खतरनाक हैं। इन नीली किरणों से मैक्यूलर डी जेनरेशन् का खतरा होता है। इससे युवा अंधे तक हो सकते हैं।
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मूड पर पड़ता है नकारात्मक असर- नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि बायोलॉजिकल क्लॉक को दुरुस्त रखने के लिए धीमी नीली रोशनी मददगार साबित होती है लेकिन अधिक नीली रोशनी के प्रभाव में रहने पर यह रोशनी व्यक्ति की निद्रा में खलल डालती है। इससे लोगों के मूड पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
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पलकें झपकाने के समय में अंतर- मनुष्य की पलकें आंखों को गीला रखने के लिए तीन से पांच सेकंड के अंतराल में झपकती रहती हैं। लेकिन फोन के संपर्क में अधिक रहने पर उसके पलकों के झपकाने के समय में अंतर आ जाता है। इससे आंखों में लाली, सूजन, दर्द और थकान रहती है।
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इलेक्ट्रानिक गैजेट से रहें दूर- इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल, शिमला (आईजीएमसी) के ओपथेमोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डाक्टर रामलाल ने बताया कि छोटे बच्चों को इलेक्ट्रानिक गैजेट का कम इस्तेमाल करना चाहिए। संतुलित आहार समय-समय पर लेना चाहिए ताकि छोटी उम्र में बच्चों को नेत्र दोष न हों।