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बड़ा दिन, जब 36 घंटे के भीतर भारत से हारा था पाकिस्तान

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4 जुलाई, आज से ठीक 16 साल पहले भारतीय जवानों ने पाकिस्तान को अपनी ताकत दिखाई थी। 36 घंटे की लंबी लड़ाई के बाद पाक घुसपैठियों ने आज ही के दिन कारगिल के टाइगर हिल्स में अपनी हार मानी थी। आइए उन जवानों को याद करते हैं जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दे दी थी।
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4 जुलाई 1999, यह वही दिन ‌था जब नौ जवानों ने शहादत देकर कश्मीर के द्रास सेक्टर में टाइगर हिल्स पर फिर तिरंगा फहराया था। हालांकि कारगिल पर विजय का अभियान 26 जुलाई को पूरा हुआ था।
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मगर यहां सबसे अहम माने जाने वाले टाइगर हिल्स पर चार जुलाई को भारत ने कब्जा जमाया था। द्रास सेक्टर की टाइगर हिल्स पर पाकिस्तानी घुसपैठियों ने धोखे से अपना कब्जा जमा लिया था।

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भारतीय सेना की ओर से 18वीं ग्रेंडियरर्स को इस प्वाइंट पर कब्जा करने की जिम्मेदारी दी गई। करीब 36 घंटे तक चली लंबी लड़ाई के बाद सेना ने टाइगर हिल्स पर कब्जा कर लिया। घुसपैठिए जान बचाकर भागे। कई मारे भी गई।
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करीब 17500 फीट की ऊंचाई पर स्थित टाइगर हिल्स को पाकिस्तान से छुड़ाने के लिए भारतीय सेना ने ऐसी रणनीति बनाई कि दुश्मन भी हैरान हर गए थे।
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ये इसी रणनीति का नतीजा था कि दुश्मन 120 गन छोड़ने को मजबूर हो गए थे। इस टुकड़ी की अगुवाई हवलदार योगेंद्र यादव और लेफ्टिनेंट बलवंत सिंह ने की थी।
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इस लड़ाई में सेना के 9 जवान शहीद हो गए थे जबकि 20 घायल हुए थे। बाद में योगेंद्र यादव को उनकी बहादुरी के लिए देश के सबसे बड़े सेना सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

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हिमाचल से परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बतरा भी कारगिल की इस जंग का हिस्सा रहे थे। हालांकि, उन्हें दूसरे प्वाइंट की जिम्मेदारी दी गई थी और उन्होंने भी बहादुरी दिखाते हुए पाकिस्तान को यहां से भागने पर मजबूर कर दिया था।
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आज सेना के तमाम जवान इन शहीदों को श्रद्घांजलि दे रहे हैं। हिमाचल में भी कैप्टन विक्रम बतरा समेत इन जवानों को याद किया जा रहा है। सभी फोटो सोशल मीडिया से
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