यह तस्वीरें जो आप देख रहे हैं ये उत्तर भारत के पहले और देश के दूसरे हाइड्रो पावर हाउस की हैं। 1902 में कर्नाटक के शिवानासमुद्रा में देश का पहला हाइड्रो पावर प्लांट बनाया गया था। इसके बाद वर्ष 1908 में हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के तत्कालीन शासक भूरी सिंह ने हाइड्रो पावर हाउस (35 किलोवाट-डीसी) का निर्माण करवाकर चंबा को रोशन किया था। इनपुट: अरविंद ठाकुर
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जानें 107 साल पहले कैसे बना था उत्तर भारत का पहला पावर हाऊस
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भूरि सिंह पावर हाउस के सूचना पट्ट पर इस बात का उल्लेख है।
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हालांकि कई जगहों पर इस चीज का उल्लेख भी है कि एशिया में सबसे पहले बिजली हिमाचल के चंबा जिले में आई थी लेकिन इसके पुख्ता प्रमाण नहीं हैं।
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स्थापना के बाद से ही पावर हाउस में विद्युत उत्पादन का सिलसिला जारी है। पावर हाउस में उत्पादित बिजली की आपूर्ति शहर के विभिन्न हिस्सों में की जाती है। वर्तमान में बिजली बोर्ड ने इस पावर हाउस को आउटसोर्स कर निजी हाथों में सौंप दिया है। हालांकि उत्पादित बिजली की खरीद-फरोख्त बोर्ड के माध्यम से होती है। इस पावर हाउस में रोजाना 6 हजार यूनिट विद्युत उत्पादित की जाती है।
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उस वक्त इस हाइड्रो पावर हाउस को बनाने पर 2.75 लाख रुपये खर्च आया था।
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1938 तक इस स्टेशन की क्षमता 35 किलोवाट (डीसी) यानी लगभग 47 ब्रेक हॉर्सपावर थी। एक और रोचक बात यह है कि वर्तमान में बना भूरी सिंह पावर हाउस शुरू में यहां से करीब 125 किमी दूरी पर बनाया गया था जिसे 1938 में तत्कालीन शासक राजा शाम सिंह ने यहां शिफ्ट किया था। 1938 में इस स्टेशन की क्षमता 100 किलोवाट (डीसी) और बढ़ा दी गई। 1958 में 100 किलोवाट (एसी) का एक और सेट लगाया गया। इसकी कुल क्षमता 250 किलोवाट हो गई।
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1938 के बाद उस वक्त चंबा के स्टेट चीफ इंजीनियर गुरूदिता लाल महाजन इस पावर हाऊस की देखरेख करते रहे। उन्होंने अपने ऑफिस के दस्तावेजों में इस बात का जिक्र किया है कि जब वे चंबा में मैट्रिक के पेपरों की तैयारी कर रहे थे तो बिजली की रोशनी में पढ़ाई की और किसी काम से लाहौर गया तो केरोसिन तेल के दीये की रोशनी में काम करना पड़ा।
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1985 में चंबा के स्टेट चीफ इंजीनियर गुरूदिता लाल महाजन के बेटे और एचपीएसईबी के चेयरमैन कैलाश चंद महाजन ने 50 लाख रुपये खर्च कर इसकी क्षमता 250 किलोवाट और बढ़ाई जो कि कुल 450 किलोवाट हो गई। वर्तमान में इसकी क्षमता 450 किलोवाट है।
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भूरि सिंह पावर हाउस साल नदी के किनारे पर बना है। यह नदी रावी में मिलती है।
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वीकीपीडिया पर इस बात का भी जिक्र है कि चंबा में बिजली आने के कई साल बाद लाहौर में बिजली आई थी।
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एक और दिलचस्प बात कि 1905 के दौरान दिल्ली में जॉन फ्लेमिंग ने डीजल पावर स्टेशन बनाया था। उन्हें Indian Electricity Act 1903 के तहत पावर स्टेशन बनाने की अनुमति दी गई थी। लेकिन इससे पूरी राजधानी रोशन नहीं हो पाई। यह सिर्फ हाई क्लास लोगों की जरूरतें पूरी करने के लिए बनाया गया था।