सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मनाली लेह मार्ग को खोलने के लिए (बीआरओ) बार्डर रोड आर्गनाइजेशन के जवान जी जान से लगे हैं। इन जवानों की मेहनत से रोहतांग सहित लेह में भारी बर्फबारी के बीच फंसे लोगों को जीवनदान मिलेगा। सभी फोटो: अजय कुमार, कुल्लू
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माइनस 20 डिग्री का तापमान, लक्ष्य बर्फ की दीवार
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मनाली लेह मार्ग को खोलने के लिए बीआरओ के जवानों को कड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रोहतांग तक पहुंचने के लिए उन्हें दस फुट से अधिक बर्फ को काटना होगा।
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रोहतांग मार्ग में हालात यह है कि बीआरओ के स्नो कटर भी बर्फ में दब रहे हैं। हर समय ग्लेशियरों के टूटने का खतरा भी मंडराता है। बावजूद इसके लोगों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए जवान जान जोखिम में डालकर इस काम को अंजाम दे रहे हैं।
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रोहतांग सुरंग के नार्थ पोर्टल में अभी भी कई कामगार फंसे हुए हैं। लिहाजा, कंपनी और केंद्र सरकार की ओर से सीमा सड़क संगठन पर रोहतांग दर्रे की बहाली को लेकर लगातार दबाव बना हुआ है।
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राशन खरीदारी और मेडिकल उपचार के लिए कुल्लू आए लाहौल-स्पीति के लोग कुल्लू-मनाली में ही कई दिनों से फंसे हैं। इन लोग को रोहतांग दर्रे की बहाली का बेसब्री से इंतजार है।
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भारी हिमपात होने के कारण लेह सहित अन्य दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों और छात्रों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से मनाली लाया जा रहा है। इसके लिए भी मारामारी है।