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यहां पार्किंग के नाम पर पर्यटकों से हो रही लूट-खसोट और मनमानी, देखिए तस्वीरें

Mon, 08 Jan 2018 02:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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पर्यटन सीजन शुरू होते ही इस शहर की पार्किंग में सैलानियों से लूट का सिलसिला भी शुरू हो गया है। वीकेंड पर शिमला पहुंच रहे सैलानियों से यहां की पार्किंग में अवैध वसूली की जा रही है। प्रशासन और नगर निगम इन सबसे बेखबर हैं।  सैलानियों से यह लूट से की जा रही है, इसका सच जानने के लिए अमर उजाला की टीम ने लिफ्ट स्थित शहर की सबसे बड़ी पार्किंग का निरीक्षण किया। पाया कि पार्किंग में सैलानियों से कैसे अवैध वसूली की जा रही है।
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टाइम पूछा नहीं, बस पर्ची थमा दी
दिन: रविवार, दोपहर 1:33 मिनट। अपनी टैक्सी में एक परिवार को शिमला लाए पंजाब के विपिन कुमार ने बताया कि पार्किंग में बिना टाइम पूछे ही उन्हें 94 रुपये की पर्ची थमा दी और 100 रुपये ले लिए। वह दो-तीन घंटे के लिए यहां गाड़ी पार्क कर रहे थे। उनसे सिर्फ इतना पूछा गया कि आज वापस जाना है या कल। आज वापसी कहने पर आठ घंटे की पर्ची कट गई। कहा कि उन्हें मालूम नहीं था कि दो या चार घंटे की कम पर्ची कटती है। पार्किंग में लिस्ट भी नहीं दिख रही जिसमें फीस का पता चल सके।
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एक घंटे के 100 रुपये, बकाया भी वापस नहीं
समय दोपहर 1:50 मिनट। यमुनानगर से दोस्तों के साथ कार में शिमला घूमने आए जसवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने एक घंटे के लिए पार्किंग में अपनी गाड़ी खड़ी की थी। इसके बदले उनसे 100 रुपये फीस ली। रसीद देखी तो इसमें 0-8 घंटे तक के लिए 94 रुपये लिखे थे। हमने कहा भी कि एक घंटे के लिए ही गाड़ी पार्क करेंगे। लेकिन कर्मचारी ने आठ घंटे वाली रसीद थमा दी। बकाया भी वापस नहीं किया।

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ऐसे चल रहा लूट का खेल
पार्किंग में लूट का खेल इस तरह से चल रहा है कि खुद सैलानियों तक को इसका पता नहीं चलता। दोपहर बाद आने वाले सैलानियों से टाइम की जगह सिर्फ यह पूछा जाता है कि आज वापसी करनी है या कल। जिन्हें उसी दिन वापसी करनी है, उन्हें 94 रुपये जबकि अगले दिन वापसी करने वालों को 177 रुपये की रसीद दी जाती है। अब एक घंटे की पार्किंग के लिए भी आठ घंटे के पैसे वसूले जा रहे हैं। सैलानी समझते हैं कि एक से लेकर आठ घंटे तक की रेट लिस्ट एक जैसी है। जबकि 0-2 घंटे की पार्किंग के 35, 2-4 घंटे के 59 रुपये शुल्क बनता है। सिर्फ लोकल गाड़ियों की ही यह रसीद कटती है।
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बकाया न देकर कमा रहे हजारों
रसीद काटने के बाद सैलानियों को बकाया भी वापस नहीं किया जा रहा। यदि किसी सैलानी की 94 रुपये की रसीद कटती है तो बाकी छह रुपये वापस नहीं होते। पूछने पर खुले पैसे न होने का बहाना। वीकेंड पर इस पार्किंग में करीब 300 गाड़ियां पार्क होती हैं। बकाया वापस न होने की स्थिति में 1800 रुपये कर्मचारियों की जेबों में जा रहे हैं।
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रेट लिस्ट आज तक नहीं लगाई
नगर निगम ने शहर की सभी पार्किंग में गेट पर बड़ी रेट लिस्ट लगाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन शहर की सबसे बड़ी पार्किंग में महज कागज के एक पेज पर रेट लिस्ट दर्शाई जा रही है। पर्ची काउंटर पर लगी यह रेट लिस्ट इतनी छोटी है कि दिखती तक नहीं। वहीं, पर्ची काउंटर पर नहीं बल्कि कर्मचारी गेट पर ही काट देते हैं। जिससे रेट लिस्ट तक सैलानी पहुंच ही नहीं पाते।
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क्या कहते हैं संचालक
पिछले एक हफ्ते से मैं शिमला से बाहर हूं। पार्किंग में क्यों बकाया वापस नहीं दे रहे हैं, या पैसों की रसीद काटी जा रही है, इसकी जानकारी नहीं है। वापस आने पर ही कुछ बता पाऊंगा। -अनिल कुमार, पार्किंग मैनेजर

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क्या कहते हैं निगम आयुक्त
अभी तक इस तरह की वसूली की कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि ऐसा है तो इसकी जांच की जाएगी। निगम पार्किंग में अवैध वसूली नहीं होने देगा।-रोहित जम्वाल, नगर निगम आयुक्त

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पर्यटकों से पार्किंग की ज्यादा वसूली का मामला मेरे ध्यान में नहीं आया है। पिछले महीने मैं रिकॉर्ड चेक कर चुका हूं लेकिन तब सब ठीक था। देखा जाएगा कि कहीं कर्मचारी तो नहीं गड़बड़ी कर रहे। सोमवार को खुद इसका पता करूंगा।-पीके सूद, कांट्रैक्टर
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सर्कुुलर रोड से लिफ्ट तक टैक्सियों की लंबी कतार लगी है। पार्किंग में गाड़ियां खड़ी कर सैलानी मालरोड जाने के लिए एचपीटीडीसी की लिफ्ट का रुख कर रहे हैं। लिफ्ट जाने वाले रास्ते के दोनों ओर टैक्सियां खड़ी है जिसके कारण सिर्फ एक आदमी की आवाजाही की जगह बाकी बची है। जगह संकरी होने के कारण महिलाआें, बुजुर्गों और बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सर्कुुलर रोड से लिफ्ट तक पूरा परिसर गड्ढों में तब्दील है। एक ओर पत्थरों का ढेर लगा हुआ है दूसरी ओर बेतरतीब खड़ी गाड़ियों के बीच से सैलानियों को बड़ी मुश्किल से आगे निकलना पड़ रहा है।
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