अधिकारिक रूप से छोटे शाही स्नान से ही पवित्र मणिमहेश यात्रा का आगाज होता है। ये यात्रा 15 दिन के बाद राधाष्टमी के शाही स्नान के उपरांत संपन्न होती है।
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पवित्र मणिमहेश यात्रा के तहत आज कृष्णाष्टमी के तहत शाही स्नान शुभ मुहूर्त शाम 8:48 से आरंभ होकर तीन सितंबर को शाम 7:30 बजे तक रहेगा। ऐसी मान्यता है कि इस शुभ मुहूर्त में भोले के भक्त डल झील में डुबकी लगाकर पुण्य के भागी बनते हैं।
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मणिमहेश डलझील समुद्रतल से 13 हजार 500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। मणिमहेश यात्रा के दौरान शिव भक्तों को विभिन्न पड़ावों को पार करते हुए पवित्र डल तक पहुंचना पड़ता है। पुरानी मान्यता के अनुसार चंबा के चौगान को शिवभक्तों का पहला पड़ाव माना जाता है।
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इसके उपंरात भोले के भक्त भरमौर स्थित भरमाणी दूसरा पड़ाव, हडसर में तीसरा पड़ाव, धनछौ में चौथा पड़ाव, सुंदरासी में पांचवां पड़ाव, गौरीकुंड में छठा पड़ाव, शिव कलोत्री में सातवां पड़ाव और अंतिम पड़ाव पवित्र डल झील रहता है।
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पवित्र मणिमहेश यात्रा के तहत पठानकोट व कांगड़ा से बसों व अन्य वाहनों के जरिए जिला मुख्यालय चंबा पहुंचा जा सकता है। इसके उपंरात 65 किलोमीटर का सफर तय कर शिवभक्त भरमौर पहुंचते हैं। भरमौर से बसों के जरिए 13 किलोमीटर का सफर तय कर शिवभक्त हड़सर अपने अगले पड़ाव पर पहुंच सकते हैं।
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चॉपर के जरिए भी श्रद्धालु भरमौर स्थित हेलीपैड से गौरीकुंड तक पहुचते हैं। हड़सर के बाद श्रद्धालु 6 किलोमीटर का सफर तय कर धनछौ पड़ाव, धनछौ पड़ाव से 6 किलोमीटर कर सफर तय कर श्रद्धालु गौरीकुंड पहुंचते हैं।
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गौरीकुंड से आगे पवित्र मणिमहेश स्थित डल झील तक मात्र एक किलोमीटर की यात्रा श्रद्धालुओं के लिए कठिनाई भरी रहती है। जैसे-जैसे श्रद्धालु ऊंचाई की तरफ आगे बढ़ते है वहां पर ऑक्सीजन की मात्रा में भी कमी हो जाती है।
एक किलोमीटर का सफर तय कर श्रद्धालु पवित्र मणिमहेश स्थित डल में पहुंच कर शिवशंकर के चरणों में माथा टेक पवित्र डल में डुबकी लगा पुण्य के भागी बनते हैं। हर वर्ष हजारों की तादाद में भोले के भक्त पवित्र मणिमहेश में पहुंच पवित्र डल में डुबकी लगाते हैं।