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भस्मासुर से बचने के लिए यहां छिपे थे भोलेनाथ, रो पड़ीं थी मां पार्वती

Thu, 14 Jul 2016 02:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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18000 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव की यात्रा 15 जुलाई से शुरू होने जा रही है। श्रीखंड की कहानी बड़ी ही रोचक है तभी तो हर कोई यहां जाना चाहता है। कहते हैं भस्मासुर राक्षस ने यहां तपस्या की और भगवान शिव से वरदान मांगा। वरदान यह था कि जिसके सिर पर भी वह अपना हाथ रखेगा वह भस्म हो जाएगा। - फोटो : अमर उजाला
18000 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव की यात्रा 15 जुलाई से शुरू होने जा रही है। श्रीखंड की कहानी बड़ी ही रोचक है तभी तो हर कोई यहां जाना चाहता है। कहते हैं भस्मासुर राक्षस ने यहां तपस्या की और भगवान शिव से वरदान मांगा। वरदान यह था कि जिसके सिर पर भी वह अपना हाथ रखेगा वह भस्म हो जाएगा।
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मगर अहंकार में भस्मासुर भगवान शिव के ही पीछे पड़ गया। मजबूरन भोलेनाथ को इन पहाड़ की गुफाओं में छिपना पड़ा। राक्षस के डर से पार्वती यहां रो पड़ीं। कहते हैं कि उनके अश्रुओं से यहां नयनसरोवर का निर्माण हुआ। इसकी एक एक धार यहां से 25 किमी नीचे भगवान शिव की गुफा निरमंड के देव ढांक तक गिरती है। बाद में भस्मासुर का वध किया गया। श्रीखंड यात्रा के दौरान लोग इस सरोवर पर जाना नहीं भूलते। - फोटो : अमर उजाला
मगर अहंकार में भस्मासुर भगवान शिव के ही पीछे पड़ गया। मजबूरन भोलेनाथ को इन पहाड़ की गुफाओं में छिपना पड़ा। राक्षस के डर से पार्वती यहां रो पड़ीं। कहते हैं कि उनके अश्रुओं से यहां नयनसरोवर का निर्माण हुआ। इसकी एक एक धार यहां से 25 किमी नीचे भगवान शिव की गुफा निरमंड के देव ढांक तक गिरती है। बाद में भस्मासुर का वध किया गया। श्रीखंड यात्रा के दौरान लोग इस सरोवर पर जाना नहीं भूलते।
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एक कथा के अनुसार जब पांडवों को 13 वर्ष का वनवास हुआ तो उन्होंने कुछ समय यहां बिताया। इसके साक्ष्य वहां भीम द्वारा बड़े-बड़े पत्थरों का काटकर रखना बताया जाता है। उन्होंने यहां एक राक्षस को मारा था, जो यहां आने वाले भक्तों को मार खाता था।
एक कथा के अनुसार जब पांडवों को 13 वर्ष का वनवास हुआ तो उन्होंने कुछ समय यहां बिताया। इसके साक्ष्य वहां भीम द्वारा बड़े-बड़े पत्थरों का काटकर रखना बताया जाता है। उन्होंने यहां एक राक्षस को मारा था, जो यहां आने वाले भक्तों को मार खाता था।

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राक्षस का लाल रक्त जब जमीन पर पड़ा तो उस जगह की जमीन रंग लाल हो गई। यह आज भी वहां लाल रंग में मौजूद है। भीमडवार पहुंचने के बाद रात के समय यहां कई जड़ी-बूटियां चमक उठती हैं। भक्तों का दावा है कि इनमें से कई संजीवनी बूटी भी मौजूद है। - फोटो : अमर उजाला
राक्षस का लाल रक्त जब जमीन पर पड़ा तो उस जगह की जमीन रंग लाल हो गई। यह आज भी वहां लाल रंग में मौजूद है। भीमडवार पहुंचने के बाद रात के समय यहां कई जड़ी-बूटियां चमक उठती हैं। भक्तों का दावा है कि इनमें से कई संजीवनी बूटी भी मौजूद है।
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यात्रा के दौरान पार्वती बाग भी रास्ते में पड़ता है। कहते हैं यह बाग मां पार्वती से जुड़ा हुआ है। यहां रंग बिरंगे फूल आज भी खिलते हैं। ये फूल इस स्‍थान के अलावा और कहीं नहीं मिलते।
यात्रा के दौरान पार्वती बाग भी रास्ते में पड़ता है। कहते हैं यह बाग मां पार्वती से जुड़ा हुआ है। यहां रंग बिरंगे फूल आज भी खिलते हैं। ये फूल इस स्‍थान के अलावा और कहीं नहीं मिलते।
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करीब 32 किलोमीटर लंबी इस यात्रा में बर्फीले और जड़ी-बूटियों से लदे पहाड़ आते हैं। सुंदर और मनमोहक शीतलमंद सुगंधित वायु चलती है। शिव आराधना करते भक्त संकरे मार्ग पर आगे बढ़ते जाते हैं। इस बार यात्रा पर वही भक्त जा पाएंगे, जो मेडिकल में फिट होंगे। यात्रा पर जाने के लिए हर यात्री को 50 रुपये में पंजीकरण करवाना होगा।
करीब 32 किलोमीटर लंबी इस यात्रा में बर्फीले और जड़ी-बूटियों से लदे पहाड़ आते हैं। सुंदर और मनमोहक शीतलमंद सुगंधित वायु चलती है। शिव आराधना करते भक्त संकरे मार्ग पर आगे बढ़ते जाते हैं। इस बार यात्रा पर वही भक्त जा पाएंगे, जो मेडिकल में फिट होंगे। यात्रा पर जाने के लिए हर यात्री को 50 रुपये में पंजीकरण करवाना होगा।
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इस बार श्रीखंड महादेव यात्रा को सरकार ने प्रशासन के सुपुर्द किया है। यात्रा के दौरान सिंघगाड़, थाचडू और भीमडवारी में तीन बेस कैंप होंगे। यहां डॉक्टरों की टीम, पुलिस, होमगार्ड जवान और रेस्क्यू टीम सहित करीब 35 लोग मौजूद रहेंगे। यात्रियों को जत्थे में भेजा जाएगा। सुबह बेस कैंप भीमडवारी से पांच बजे से नौ बजे तक भेजकर अंतिम जत्थे के साथ रेस्कयू दल रवाना होगा। शाम को श्रद्धालु श्रीखंड महादेव के दर्शन कर भीमडवारी में ठहराकर रवाना किए जाएंगे।
इस बार श्रीखंड महादेव यात्रा को सरकार ने प्रशासन के सुपुर्द किया है। यात्रा के दौरान सिंघगाड़, थाचडू और भीमडवारी में तीन बेस कैंप होंगे। यहां डॉक्टरों की टीम, पुलिस, होमगार्ड जवान और रेस्क्यू टीम सहित करीब 35 लोग मौजूद रहेंगे। यात्रियों को जत्थे में भेजा जाएगा। सुबह बेस कैंप भीमडवारी से पांच बजे से नौ बजे तक भेजकर अंतिम जत्थे के साथ रेस्कयू दल रवाना होगा। शाम को श्रद्धालु श्रीखंड महादेव के दर्शन कर भीमडवारी में ठहराकर रवाना किए जाएंगे।

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यात्रियों को अपने साथ गर्म कपड़े, मोटी जुराबें, टॉर्च, डंडा और जरूरी दवाएं साथ रखनी जरूरी हैं।
यात्रियों को अपने साथ गर्म कपड़े, मोटी जुराबें, टॉर्च, डंडा और जरूरी दवाएं साथ रखनी जरूरी हैं।

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रामपुर से लगते निरमंड से आगे जाओं नामक स्थान से करीब 32 किमी पैदल यात्रा कर भक्तजन श्रीखंड महादेव पहुंच सकते हैं। जाओं से आगे सिंहगाड, थाचडू, भीमडवारी, नयन सरोवर और पार्वती बाग जैसे कई सुंदर स्थान हैं।
रामपुर से लगते निरमंड से आगे जाओं नामक स्थान से करीब 32 किमी पैदल यात्रा कर भक्तजन श्रीखंड महादेव पहुंच सकते हैं। जाओं से आगे सिंहगाड, थाचडू, भीमडवारी, नयन सरोवर और पार्वती बाग जैसे कई सुंदर स्थान हैं।
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बाहरी यात्री सरकारी संस्थानों से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट ला सकते हैं। हर यात्री को पंजीकरण फीस 50 रुपये देनी अनिवार्य है।
बाहरी यात्री सरकारी संस्थानों से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट ला सकते हैं। हर यात्री को पंजीकरण फीस 50 रुपये देनी अनिवार्य है।
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