नासिर यूसुफजई, वरिष्ठ रंगकर्मी
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गैर हिंदी भाषा क्षेत्रों में मिले महत्व
हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, इसे गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी बढ़ावा मिलना चाहिए। यह तभी संभव है जब सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं कामकाज में इसका व्यापक इस्तेमाल करें। नाटकों के जरिये हिंदी के प्रति लोगों को आकर्षित किया जा सकता है। नाटक ही एकमात्र ऐसा साधन है जो लोगों से सीधा संवाद कर सकता है। - नासिर यूसुफजई, वरिष्ठ रंगकर्मी