मंडी जिले में बादल फटने के बाद आई बाढ़ ने तबाही मचा दी। लोग मलबे के ढेर में अपनों की तलाश करते रहे। सड़कों का नामोनिशान तक मिट गया।जीवनदायिनी बाखली खड्ड ही रौद्र रूप दिखा लोगों के घरों और सपनों को साथ बहाकर ले गई।
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जंजैहली के पांडवशिला के पास तबाही का मंजर
- फोटो : जागरूक पाठक
मंडी जिले के सराज के लंबाथाच, जरोल, तुंगाधार, रोड़ और पांडवशिला पंचायतों में बादल फटने के बाद आई बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई कि गांवों का नक्शा ही बदल गया। बाखली खड्ड कभी इन गांवों की जीवनदायिनी थी। खड्ड के रौद्र रूप ने इलाके की सड़कों का नामोनिशान मिटा दिया।
पानी ने लोगों के घरों और सपनों को बहा दिया। लोग मलबे के ढेर में अपनों की तलाश कर रहे हैं। बिजली और पानी की आपूर्ति ठप है। प्रभावित परिवार एक-दूसरे के सहारे जीने को मजबूर हैं, रिश्तेदारों के घरों में पनाह ले रहे हैं या अस्थायी शिविरों में दिन काट रहे हैं।
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थुनाग में पानी के जलजले से हुई तबाही का मंजर
- फोटो : जागरूक पाठक
लंबाथाच में बाखली खड्ड ने मुख्य सड़क को तहस-नहस कर दिया। बुनागी मोड़ से बलैंढ़ा तक दो किलोमीटर सड़क गायब है। महेंद्र पाल, राजेंद्र, वीरेंद्र, सुंदर सिंह और अन्य के 18 घर व 25 गोशालाएं मलबे में दब गईं।
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थुनाग में पानी के जलजले से हुई तबाही का मंजर
- फोटो : जागरूक पाठक
पंचायत प्रधान संतोष कुमार ने बताया, बिजली और पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप है। लोग मलबे से सामान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। मोबाइल की बैटरी खत्म होने से संपर्क करना मुश्किल है।
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जंजैहली में खड्ड पर लकड़ी की पुलिया पार करते ग्रामीण
- फोटो : जागरूक पाठक
जरोल में तिलक राज का पांच मंजिला भवन समेत 14 घर बाखली खड्ड में समा गए। नेत्र सिंह, वेद राम, गोकुल और अन्य के घर नक्शे से मिट चुके हैं। पंचायत प्रधान नरेश कुमार ने कहा कि 10 दिन का राशन बचा है, लेकिन बिजली और पानी नहीं है। कुछ जगहों पर मोबाइल सिग्नल आया है, पर बैटरी चार्ज करने का कोई साधन नहीं।
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मलबे के ढेर में लापता लोगों को तलाश करते हुए
- फोटो : जागरूक पाठक
पांडवशिला में वीरेंद्र सिंह और रोशन लाल लापता हैं, उनके घरों में मातम छाया है। शांति देवी ने बताया कि हम रिश्तेदारों के घर रह रहे हैं। तुंगाधार रोड और कुथाह से ओड़ीधार तक सड़क खड्ड में समा गई। इससे ये गांव जंजैहली व थुनाग से कट गए। स्थानीय युवक राकेश ने कहा कि मोबाइल सिग्नल तो आया, लेकिन चार्जिंग के बिना क्या फायदा?
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सराज के आपदा प्रभावित क्षेत्र से ग्रामीणों को निकालते सेना के जवान
- फोटो : जागरूक पाठक
पैदल चलकर पहुंचीं आपदा प्रबंधन की टीम
शनिवार को आपदा प्रबंधन और एनडीआरएफ की टीमें पैदल चलकर इन पंचायतों तक पहुंचीं और राशन, कंबल, और दवाइयां बांटीं। सड़कों के अभाव में राहत कार्य धीमे हैं। लंबाथाच तक छोटे वाहनों के लिए सड़क खुली है, लेकिन जरोल, तुंगाधार, रोड और पांडवशिला तक पहुंचना अब भी मुश्किल है।
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सराज क्षेत्र के सुराह में पुराने रास्ते खोजते आपदा प्रभावित राहगीर
- फोटो : जागरूक पाठक
वहीं, बाढ़ प्रभावित इलाके की एक बुजुर्ग महिला कमला देवी ने कहा कि बादल फटने के बाद आई आपदा में सब कुछ चला गया, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी। उधर, उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने बताया कि युद्ध स्तर पर राहत कार्य कर रहे हैं, लेकिन सड़क बहाली में समय लग सकता है। अधिकारी और कर्मचारी राहत कार्यों में जुटे हैं।
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पंडोह में ब्यास नदी किनारे लापता लोगों को ढूंढते एनडीआरएफ जवान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राहत कार्य में जुटे एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के 250 जवान
आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहत और पुनर्वास कार्य के लिए एनडीआरएफ व एसडीआरएफ के 250 जवान तैनात किए गए हैं। प्रभावित क्षेत्र के लोगों को राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 2 हेलिकाप्टर भी तैनात किए गए हैं। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि बगस्याड़ से थुनाग तक सड़क खोलने का कार्य अंतिम चरण में है।
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डिप्टी सीएम की छलांग, सराज के शरण में रास्ते व सड़क ध्वस्त होने पर प्रभावित इलाके तक पहुंचना मुश्किल
- फोटो : जागरूक पाठक
जंजैहली क्षेत्र को जोड़ने वाली करसोग, गाड़ागुसैणी तथा थुनाग की ओर से जाने वाली सड़कें खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। राशन पीठ पर उठाकर जंजैहली पहुंचाया गया है। जंजैहली से पर्यटकों को निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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सराज क्षेत्र में हुई तबाही से प्रभावित लोगों से मुलाकात करते नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर
- फोटो : जागरूक पाठक
आंखों देखी: जान जोखिम में डालकर निकाला टीचर का परिवार
30 जून की रात हम खाना खाने के बाद सोने की तैयारी में थे, तभी मकान मालिक ने सूचना दी कि थुनाग से आठ किलोमीटर दूर डेजी गांव में बादल फटा है। सबसे पहले बागवानी और वानिकी कॉलेज थुनाग के छात्रों और हॉस्टल में रह रहे प्रशिक्षुओं को फोन कर सूचित किया कि सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
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थुनाग में तबाही की तस्वीर।
- फोटो : संवाद
मंडी जिले के सरकाघाट क्षेत्र के काश गांव निवासी प्रशिक्षु साहिल ठाकुर और जिला सिरमौर की प्रशिक्षु रोनित ने बताया कि कॉलेज के 150 से अधिक विद्यार्थी थुनाग में फंसे हुए थे। बड़ी मुश्किल से इधर-उधर भागकर जान बचाई। कोर्ट के भवन में मोबाइल की रोशनी जल रही थी।
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बादल फटने से हुई तबाही।
- फोटो : संवाद
वहां उन्हीं के कॉलेज की अध्यापिका कल्पना ठाकुर, उनके पति और बच्चा पानी में फंस चुके थे। उनकी गर्दन तक पानी पहुंच चुका था। जान की परवाह न करते हुए बचाने दौड़ पड़े और बड़ी मुश्किल से उन तीनों को सुरक्षित निकाला।
पहली जुलाई की सुबह दो शव मिले। चारों तरफ तबाही का मंजर देखकर रौंगटे खड़े हो गए। प्रशिक्षुओं ने बताया कि यहां से कॉलेज को शिफ्ट किया जाए। परीक्षाएं नौणी विश्वविद्यालय में ली जाएं।