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इस राज्य के नाम हुआ एशिया के सबसे ऊंचे गांव तक बस चलाने का रिकॉर्ड

Sat, 20 May 2017 10:54 AM IST
दिनेश जस्पा/अमर उजाला, उदयपुर (लाहौल-स्पीति)
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PIC
सबसे लंबे रूट और दुर्गम इलाकों में बस सेवा का सफल संचालन कर इस राज्य ने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करवा लिया है। 
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एशिया के सबसे ऊंचे गांव किब्बर (लाहौल स्पीति, हिमाचल प्रदेश)और बर्फ से ढके रहने वाले 1245 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मनाली-लेह रूट पर बस सुविधा देने वाले एक मात्र निगम एचआरटीसी के नाम नेशनल रिकॉर्ड भी है।
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लाहौल-स्पीति का किब्बर गांव समुद्र की सतह से 14200 फीट की ऊंचाई पर बसा हुआ है। काजा से किब्बर गांव की दूरी 25 किलोमीटर है। इस संकरे और दुर्गम मार्ग से एचआरटीसी की बस 90 मिनट में यात्रियों को एशिया के सबसे ऊंचे गांव किब्बर तक पहुंचाती है। मार्ग इतना दुर्गम है कि लोग छोटा वाहन चलाने से भी डरते हैं।

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दिल्ली से वाया मनाली लेह का सफर बेहद रोमांचक और खतरों से भरा है। दिल्ली से चलने वाली एचआरटीसी की बस दूसरे दिन करीब 30 घंटे सफर के बाद लेह पहुंचती है। यात्रियों के रात्रि पड़ाव की व्यवस्था जिला मुख्यालय केलांग में होती है।
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इस रूट पर 13051 फीट ऊंचा रोहतांग दर्रा, 16400 फीट ऊंचा बारालाचा दर्रा और 17582 फीट ऊंचा तंगलंगला दर्रा पड़ता है। इन दर्रों को पार कर एचआरटीसी की बस यात्रियों को लेह तक पहुंचाती है। दिल्ली से लेह का किराया मात्र 1380 रुपये है। एचआरटीसी के महाप्रबंधक ऑपरेशन एचके गुप्ता ने लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड की ओर से पत्र मिलने की पुष्टि की है।
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हिमाचल और जेएंडके के बर्फ से लकदक पहाड़ों से गुजरने वाला मनाली-लेह मार्ग साल में मात्र चार माह के लिए खुलता है। इन महीनों में एचआरटीसी दिल्ली से लेह के लिए वाया मनाली बस सेवा शुरू करता है। पर्यटक ही नहीं सेना के जवान भी इस सेवा का लाभ उठाते हैं।
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हाल ही में रोहतांग दर्रा बहाल किया गया है। बीआरओ ने हिमाचल के सीमांत क्षेत्र सरचू तक सड़क बहाली का लक्ष्य 25 मई तक रखा है। लेह की तरफ से भी मार्ग बहाल किया जा रहा है। हर साल जून माह से इस रूट पर बस सेवा शुरू की जाती है।
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