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रिश्वतखोरी में ये विभाग नंबर वन, विजिलेंस के आंकड़ों से हुआ खुलासा

Thu, 25 Oct 2018 01:14 PM IST
विपिन चौधरी, अमर उजाला, धर्मशाला
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पिछले तीन साल में रिश्वतखोरी के सबसे अधिक मामले राजस्व विभाग में सामने आए हैं। इधर, इन तीन साल में पुलिस विभाग का कोई कर्मी और अफसर रिश्वत लेते नहीं पकड़ा गया है। वर्ष 2016 से लेकर 2018 तक विजिलेंस ने घूसखोरी के कुल 31 मामले पकड़े हैं। इनमें से 16 मामलों में राजस्व विभाग के अधीन कार्य करने वाले कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा है।
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इस लिस्ट में परिवहन विभाग दूसरे स्थान पर है। तीसरे स्थान पर सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग है। इसके अलावा अन्य विभागों में भी घूसखोरी के मामले विजिलेंस की टीम ने प्रदेश में पकड़े हैं। धर्मशाला में सबसे ज्यादा रिश्वत के मामले पकड़े गए हैं। राजधानी शिमला में इन तीन वर्षों में एक भी मामला विजिलेंस की टीम के समक्ष नहीं पहुंचा है।
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सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने धर्मशाला में सबसे अधिक 7, ऊना में 6, नाहन में 5, हमीरपुर में 4, केलांग में एक, चंबा में दो, मंडी में एक, सोलन में दो, कुल्लू में दो और कांगड़ा में एक कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है।

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किस विभाग में कितने मामले पकड़े- राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा 16 घूसखोर विजिलेंस की टीम ने पिछले 3 साल में पकड़े हैं। इनमें से 14 पटवारी, एक कानूनगो और एक नायब तहसीलदार शामिल है। इसके अलावा आईपीएच में दो, परिवहन विभाग में तीन, पंचायती राज विभाग से दो, ईपीएफओ विभाग से एक, एक ईटीओ, रोजगार कार्यालय से एक, वन विभाग से एक, बिजली बोर्ड से एक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एक, सिविल सब डिवीजन ऑफिस से एक और मंडी से न्यायाधीश शामिल हैं।
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सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो घूसखोरी और भ्रष्टाचार पर लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है। विभाग ने पिछले तीन सालों में कई भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की है। यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा। - अरुल कुमार, एसपी स्टेट विजिलेंस नॉर्थ जोन
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