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कैबिनेट में फैसला, हजारों शिक्षकों पर मेहरबान हुई हिमाचल सरकार

Sun, 06 Aug 2017 01:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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चुनावी साल में सरकार ने हजारों शिक्षकों पर खासी मेहरबानी दिखाई है। मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने यह फैसला लिया है।
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मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने पीटीए को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी करने को 16 अगस्त, 2021 तक मोहलत दी। इन शिक्षकों को राहत देते हुए सरकार ने शैक्षणिक योग्यता पूरी करने को तीन साल तक अवधि बढ़ाई है। पीटीए को दस मेडिकल और दस कैजुअल लीव देने का भी फैसला लिया है।
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न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी न करने वाले पीटीए की नौकरी संकट में आ गई थी। ऐसे करीब 4000 पीटीए हैं, जो न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करते हैं। सरकार ने इन्हें अगस्त 2017 तक समय दिया था। अब कैबिनेट ने तीन साल की और मोहलत दी है। प्रदेश में करीब 6500 पीटीए शिक्षक हैं।

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इनमें 5100 अनुबंध पर हैं और 1400 अभी भी पीटीए पर हैं। आरटीई एक्ट के तहत जेबीटी, टीजीटी को टेट पास होने के अलावा स्नातक में 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं, जबकि पीजीटी को पीजी तथा बीएड डिग्री में 50 फीसदी अंक होने चाहिए। चार हजार से ज्यादा पीटीए इन नियमों को पूरा नहीं कर रहे हैं।
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साल 2013 में सरकार ने इन्हें न्यूनतम योग्यता पूरी करने को 31 मार्च, 2015 तक समय दिया था। बाद में अवधि को साल 2017 तक बढ़ावा। अब आखिरी मौका देते हुए अपने आरएंडपी नियमाें में संशोधन कर शैक्षणिक योग्यता पूरी करने के लिए 16 अगस्त, 2021 तक समय दिया है। उधर, कैबिनेट ने लेफ्ट आउट 97 पैरा शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के बराबर स्केल देने का फैसला लिया है। यह शिक्षक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं होने के चलते नियमित कर्मियों के बराबर स्केल लेने से छूट गए थे।
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सरकार ने प्रदेश के स्कूलों में तैनात 3400 से अधिक प्राथमिक सहायक शिक्षकों को वन टाइम ट्रांसफर करने का तोहफा भी दिया है। प्राथमिक सहायक शिक्षकों (पैट) को पंचायत स्तर पर रखा गया है। इनके तबादले नहीं करने की नीति थी। शनिवार को हुई कैबिनेट में सरकार ने इन शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए खाली पद पर स्थानांतरित करने का फैसला लिया है। 
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सरकार के इस फैसले से विशेषकर वह महिला शिक्षक लाभान्वित होंगी, जो शादी के बाद भी नौकरी के चलते अपने मायके की पंचायत में तैनात थीं। इनका अब ससुराल की पंचायत में तबादला हो सकेगा। सरकार ने पैट को दस मेडिकल और दस कैजुअल लीव देने का फैसला लिया है। पहले इन शिक्षकों को मेडिकल लीव की सुविधा नहीं थी। उधर, पैट संघ की अध्यक्षा सरला वरसांटा, महासचिव अवतार राणा ने कहा कि कैबिनेट बैठक से शिक्षकों को 14 साल बाद नियमित होने का तोहफा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने ऐसा न कर शिक्षकों के साथ अन्याय किया है। जल्द नियमितीकरण की मांग को लेकर राज्य स्तर पर धरना देंगे।
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