हिमाचल प्रदेश में टूरिस्ट गाड़ियों की परमिट अवधि 12 साल से बढ़ाई
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने पर्यटन क्षेत्र से जुड़े वाहन संचालकों को बड़ी राहत देते हुए ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाले वाहनों की अधिकतम संचालन अवधि 12 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी है। इस फैसले से प्रदेश के हजारों टैक्सी ऑपरेटरों, टूरिस्ट कैब संचालकों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश में पर्यटन उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। हर साल लाखों पर्यटक हिमाचल पहुंचते हैं, जिनकी आवाजाही का बड़ा जिम्मा निजी टैक्सी और टूरिस्ट वाहनों पर होता है। ऐसे में वाहन संचालक लंबे समय से परमिट अवधि बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि 12 वर्ष पूरे होने के बाद वाहन बदलना आर्थिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण होता है, जबकि कई वाहन तकनीकी रूप से अच्छी स्थिति में होते हैं और सुरक्षित संचालन के योग्य रहते हैं।
सरकार के ताजा निर्णय के बाद अब ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाले वाहन निर्धारित फिटनेस मानकों को पूरा करने की स्थिति में 15 वर्ष तक संचालित किए जा सकेंगे। इससे वाहन मालिकों को नया वाहन खरीदने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा और उनके आर्थिक बोझ में भी कमी आएगी।
हालांकि, परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि संचालन अवधि बढ़ाने का अर्थ यह नहीं है कि वाहन बिना जांच के सड़क पर चल सकेंगे। सभी वाहनों को मोटर वाहन अधिनियम और परिवहन विभाग के नियमों के तहत समय-समय पर फिटनेस परीक्षण, वैध बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। फिटनेस मानकों में किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई है।
पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का मानना है कि इस फैसले से राज्य के पर्यटन उद्योग को मजबूती मिलेगी। विशेषकर छोटे टैक्सी ऑपरेटरों और स्वरोजगार से जुड़े वाहन मालिकों को राहत मिलेगी, क्योंकि वे अपने मौजूदा वाहनों का उपयोग अधिक समय तक कर सकेंगे। इससे पर्यटन सीजन के दौरान परिवहन सेवाओं की उपलब्धता भी बेहतर बनी रहेगी।