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तस्वीरें: नवंबर में पहाड़ बर्फ से लकदक, पड़ने लगी कड़ाके की ठंड

Mon, 05 Nov 2018 10:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल में तीन दिन से पहाड़ों पर हिमपात और मैदानों में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है। नवंबर माह की शुरुआत में ही चोटियां बर्फ से लकदक हो गई हैं। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रोहतांग में अब तक 150, कोकसर-मढ़ी में 90 सेंटीमीटर बर्फबारी रिकॉर्ड की गई है।
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कल्पा 60, जलोड़ी दर्रा में 20, सोलंगनाला में 12 और चंबा के किहार की ऊंची पहाडि़यों पर 60 सेंटीमीटर बर्फबारी रिकॉर्ड की गई है। पिछले तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस तक कमी आई है।
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शिमला, धर्मशाला, मनाली और डलहौजी समेत 12 शहरों का न्यूनतम पारा 10 डिग्री से नीचे आ गया है। प्रदेश में शीतलहर के साथ कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हो गई है।

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10500 फुट ऊंचाई पर स्थित जिला कुल्लू के धार्मिक पर्यटन स्थल सरयोलसर में 15 सेंटीमीटर तक हिमपात हुआ है।
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यहां माता बूढ़ी नागिन मंदिर के कपाट इस बार समय से पहले ही बंद हो गए हैं। अमूमन 15 नवंबर के बाद मंदिर बंद होता है।
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भक्त अब अप्रैल महीने में बैसाख संक्रांति को ही अब माता के दर्शन कर पाएंगे। प्रदेश में अभी भी दर्जनों सड़कें बंद पड़ी हैं।
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कई पर्यटक वाहन और सरकारी बसें फंसी हुई हैं। रविवार को शिमला में बादल छाए रहे। दोपहर बाद बूंदाबांदी से ठंड बढ़ गई है।

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मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने सोमवार को मध्य और उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी के आसार जताए हैं। मैदानी इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा। दिवाली पर धूप खिली रहेगी। पांच से 10 नवंबर तक मौसम साफ रहेगा।

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पिछले 24 घंटों में कंडाघाट में 21, सराहन में 34, रिकांगपिओ में 33, मनाली में 18, पालमपुर में 17, चंबा में 16, मंडी में 15, कुफरी-शिमला में 11, नयनादेवी में 6 और डलहौजी में 6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।

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न्यूनतम तापमान
केलांग    -2.1
कल्पा     -0.6
मनाली     2.8
डलहौजी    3.1
कुफरी      3.8
मंडी        7.2
शिमला     7.9
भुंतर        8.0
धर्मशाला  9.8

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बारिश के बाद घाटी के किसानों ने खेतों का रुख कर लिया है। किसान अब खेतों में गेहूं, सरसों, पालक, लहसुन और मटर की बिजाई करने में जुट गए हैं।

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किसान प्रेम सिंह, पोषू राम, गिरधारी लाल, माघू राम, नियत राम, परस राम ठाकुर, रोशन लाल, सोहन लाल, दुर्गादत्त ने कहा कि बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी हो गई है। खेतों में बीज रोप रहे हैं।

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रबी की फसल के लिए बारिश से पर्याप्त नमी होने से बिजाई का काम समय पर हो जाएगा। इस साल नवंबर में ही बारिश और ऊंचे इलाकों में बर्फबारी होने से कृषि और बागवानी के काम उपयुक्त समय पर पूरा हो जाएगा। अमूमन बर्फबारी और बारिश दिसंबर माह में होती थी, लेकिन इस वर्ष पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से जिला में नवंबर में पर्याप्त बारिश हो गई है।
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ऐसे में खेतों में लंबे समय तक नमी बरकरार रहेगी। किसानों और बागवानों का कहना है नमी के चलते खेतों में रबी फसल की बिजाई का काम समय पर पूरा होगा। ऐसे में पैदावार पर भी सकारात्मक असर होगा। वहीं, बागवान अपने बगीचों में तौलिए बनाने का कार्य और गोबर तथा खाद डालने का काम समय पर निपटा देंगे। जिला कुल्लू में रबी की फसल की बिजाई 22 हजार हेक्टेयर में होती है।
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