पहाड़ों की रानी शिमला में एडवेंचर पार्क में मौज-मस्ती करना अब महंगा हो गया है। जीएसटी लागू होने के बाद इसके लिए अब दोगुना टैक्स चुकाना होगा। ऐसे में राजधानी शिमला में बच्चों के साथ मौज-मस्ती करने की सोच रहे अभिभावकों को अपना बजट बढ़ाना होगा।
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अब अगर आप किसी एडवेंचर रिजॉर्ट में परिवार के साथ घूमने जाते हैं और वहां फन एक्टिविटी में हिस्सा लेते हैं तो आपको कुल बिल के साथ 28 फीसदी जीएसटी चुकाना होगा। सीधे शब्दों में कहें तो फन एक्टिविटी से संबंधित 5 हजार 6 सौ 25 का कोई पैकेज लेते हैं तो आपको जीएसटी के तौर पर 15 सौ 75 रुपये चुकाने होंगे।
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इससे पहले शिमला में इस तरह की गतिविधियां करवाने वाले संचालक 14 फीसदी टैक्स ले रहे थे। जीएसटी के लागू होने पर यह दोगुना हो गया है। इतना टैक्स होने से शिमला के पर्यटन व्यवसाय पर भी सीधे तौर पर असर पड़ सकता है। इसमें उन कारोबारियों का कारोबार प्रभावित हो सकता है, जिन्होंने ईमानदारी से जीएसटी अपनाकर लागू कर दिया है।
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जो जीएसटी को अपने कारोबार के दायरे में नहीं लाएगा, उसकी निगरानी कौन करेगा? ऐसे कारोबारी सीधे तौर पर राजस्व पर चोट करेंगे। इनकी धरपकड़ कैसे होगी, इस पर फिलहाल कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है। शिमला शहर के इर्द-गिर्द ऐसे कई एडवेंचर रिजॉर्ट हैं, जहां सैलानी और स्थानीय लोग परिवार के साथ रोमांच का लुत्फ लेते हैं। पहले बिल पर कस्टमर से चौदह फीसदी टैक्स लिया जाता था, लेकिन जीएसटी लागू होने से अब कस्टमर को 28 फीसदी देना पड़ रहा है।
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इसमें सारे कारोबारी जीएसटी को अपने कारोबार में लागू नहीं कर रहे हैं। इसकी सीधी मार उन कारोबारियों पर आने वाले दिनों में होगी, जो जीएसटी के अनुरूप चले हुए हैं। न्यू कुफरी गल्लू हिल के संचालक बलदेव ठाकुर ने बात करने पर बताया कि एडवेंचर से संबंधित गतिविधियों में 28 फीसदी जीएसटी निर्धारित किया गया है।
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हिमाचल में एक जुलाई से पुराने और नए स्टॉक पर जीएसटी ही लगेगा। हालांकि, कारोबारियों को राहत देते हुए विभाग ने पुराने स्टाक पर छह माह तक आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) प्राप्त करने का प्रावधान किया है। नतीजतन, कारोबारी को एक उत्पाद पर दो बार टैक्स चुकता नहीं करना पड़ेगा। नई व्यवस्था में कारोबारी को बिक्री के समय जीएसटी के प्रावधानों में ही बिल काटने होंगे। उनमें नया और पुराना स्टाक इंगित नहीं होगा। बाद में कारोबारी मासिक रिटर्न में इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम कर सकता है, जो कानूनी तौर पर रिटर्न में मौजूद रहेगा। ऐसे में प्रदेश में शराब और पेट्रोलियम पदार्थों को छोड़कर ऐसी वस्तुएं जो जीएसटी के दायरे में लाई जा चुकी हैं, उन सभी पर जीएसटी ही लगेगा, चाहे स्टॉक नया हो या पुराना।
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यह है इनपुट टैक्स क्रेडिट- इनपुट टैक्स वह टैक्स होता है, जो कारोबारी सामान खरीदते समय अदा करता है। फिर उसे बेचते हुए अपनी टैक्स की देनदारी में समायोजित करवाया जाता है, ताकि उसे दोहरे कर से बचाया जा सके।
पुराने स्टाक पर टैक्स इस तरह होगा एडजस्ट- कारोबारी को 30 जून तक की स्टॉक रिपोर्ट सबमिट करनी होगी। बिक्री के समय कारोबारी जो बिल काटेगा, उसमें पुराने या नए स्टाक का हवाला नहीं होगा। बिल पर जीएसटी ही लगेगा। कारोबारी अपनी मासिक विवरणियों में केवल छह माह तक ही इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम कर सकता है। नियमों के तहत जो आईटीसी मौजूद होगा, वही मिलेगा।
आईटीसी में दी राहत- अतिरिक्त आबकारी एवं कराधान आयुक्त हिमाचल प्रदेश संजय भारद्वाज ने कहा कि पुराने और नए स्टाक पर जीएसटी ही लगेगा। पुराने स्टाक में कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट में राहत दी गई है। कारोबारी छह माह के भीतर आईटीसी प्राप्त कर सकता है। कारोबारियों को जागरूक करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन स्थानीय स्तरों पर किया जा रहा है।
असमंजस की स्थिति- प्रदेश में कई कारोबारियों ने अभी तक पंजीकरण नहीं करवाया है। जिन कारोबारियों ने पंजीकरण करवाया है, उन्हें जीएसटीएन आईडी और पासवर्ड मुहैया नहीं हुए हैं। हालांकि, अस्थाई आईडी और पासवर्ड जारी हो चुके हैं, लेकिन अधिकांश कारोबारी जीएसटी के फेर में उलझे हुए हैं। टैक्स की नई प्रक्रिया को समझने, उसे लागू करने और स्टाक खपाने को लेकर कारोबारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।