हिमाचल के राज्यपाल ने ये कहकर सभी को चौंका दिया कि वर्ष 1989 में ही उनकी मौत घोषित हो गई थी। हिमाचल हाईकोर्ट में रविवार को राज्यपाल ने जैसे ही ये बात कही कि सभी लोग चौंक गए। आइए जानते हैं राज्यपाल ने ऐसा क्यों कहा...
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राज्यपाल ने चौंकाया, '1989 में घोषित हो गई थी मेरी मौत'
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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि 1989 में उनकी मौत घोषित हो गई थी। एम्स दिल्ली, अपोलो जैसे अस्पतालों ने यह कह दिया था।
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मगर वे आज सबके बीच हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस पर बाद में चिंतन करेंगे। वह खानपान की शुद्धता पर बात करते हुए आपबीती कह गए। हाईकोर्ट में एक समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे राज्यपाल ने खानपान को लेकर होने वाली समस्याओं के बारे में बच्चों और अभिभावकों को भी नसीहत दी।
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राज्यपाल ने जैविक कृषि और ऑर्गेनिक खानपान की
जरूरत जताते हुए जंक फूड को खतरनाक बताया। उन्होंने पेप्सी कोला, कोका कोला
का नाम लेकर चौमीन और अन्य खानपान पर उंगली उठाते हुए कहा कि जिव्हा के
स्वाद के लिए हम बच्चों में रोगाणु डाल रहे हैं।
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जंक फूड में मैदा होता है। जो हाथ में चिपक जाता है, वह आंत में कैसे उतरेगा।
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आचार्य
देवव्रत ने आईजीएमसी शिमला की ओपीडी में रोजाना पांच हजार मरीजों के आने
पर हैरानी जताते हुए कहा कि जब वे हिमाचल आए थे तो उन्होंने सोचा था कि
यहां पर शायद कोई रोगी नहीं होगा। उन्होंने रोगों की खास वजह खानपान में
विषाक्तता को बताया।
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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने युवा पीढ़ी को
नरेंद्र मोदी, रामदेव, डा. एपीजे अब्दुल कलाम, न्यूटन जैसी शख्सियतों से
सीख लेने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि टाट-पट्टी पर बैठने वालों ने ही
इतिहास बनाया है।