हिमाचल के सोलन जिले में दर्दनाक हादसा पेश आया है। शहर के सबसे पॉश इलाके उपायुक्त निवास के समीप एक दो मंजिला मकान में दोपहर लगभग 12.10 बजे आग लग गई। अफरातफरी मचने के बाद 12.20 बजे फायर ब्रिगेड को मदद के लिए फोन किया गया। चार गाड़ियां मौके के लिए रवाना की गईं, लेकिन दो वाहन शहर के मुख्य डीसी चौक और माल रोड के पास जाम में फंसे रहे। फोटो: अनिल कपूर
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मकान में जिंदा जली युवती, जाम में फंसी रही फायर ब्रिगेड
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मात्र दो किलोमीटर दूरी होने के बावजूद दमकल वाहन घटनास्थल तक 30 से 35 मिनट बाद पहुंचे। तब तक 22 वर्षीय मोना की ऊपरी मंजिल में फंसे होने के कारण जिंदा जलकर मौत हो गई। एक साल की मासूम गुल्लू को पड़ोसियों ने जान पर खेलकर जैसे-तैसे बचा लिया। मौके पर पहुंचे दो फायर टेंडर कुछ ही देर बाद खाली हो गए जबकि दो वाहन जाम में फंसे रहे। नजदीकी पुलिस स्टेशन के पास लगे हाइड्रेंट से पानी लेने का प्रयास किया गया लेकिन उसमें पानी नहीं था।
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आग ने फिर से विकराल रूप ले लिया और करीब 40 लाख की संपत्ति स्वाह हो गई। बड़ा सवाल यह है कि युवती की मौत का जिम्मेदार कौन है? जब शहर में ही दमकल वाहनों को आधा घंटा से ज्यादा का समय लगेगा तो आसपास के इलाकों में मदद समय पर कैसे पहुंचेगी। सिटी चौकी प्रभारी हरिभगत नेगी ने बताया कि आगजनी के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो सका है। केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
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पुलिस के अनुसार सोलन-शिल्ली वाया शूलिनी मंदिर मार्ग पर स्थित दो मंजिला मकान में सात परिवार रह रहे थे। अग्निकांड के समय प्रत्येक परिवार के एक या दो सदस्य ही मौजूद थे। दूसरी मंजिल में धुएं के साथ अचानक आग की लपटें निकलने लगीं।
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अफरातफरी मच गई। मकान में मौजूद सभी लोग बाहर की ओर भागे, लेकिन दूसरी मंजिल में 22 वर्षीया मोना एवं एक साल की बच्ची गुल्लू कमरे में ही फंस गई। दमकल वाहनों के पहुंचने से पहले पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से एक साल की बच्ची को बाहर निकालने में कामयाबी तो हाथ लगी, लेकिन मोना अंदर ही फंसी रही। आग की लपटों में घिरी मोना की जलकर मौत हो गई।
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दमकल विभाग अधिकारी हेमराज ने बताया कि दो फायर टेंडर आगजनी की सूचना पर अन्य जगह गए थे। डीसी चौक के पास और मालरोड पर जाम लग गया, जिससे पहुंचने में देरी हो गई। दो गाड़ियां मौके पर पहुंच गई थीं। हाइड्रेंट में पानी न होने के चलते कुछ दूरी से पानी लाना पड़ा, जिसमें समय लग गया।