खानपान और रहन सहन में बदलाव आपके लाडलों को रोगी बना रहा है। ताजा सर्वे की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। ये सर्वे शिमला के स्कूलों में बच्चों में किया गया जिसमें 76 फीसदी बच्चे किसी न किसी रोग से ग्रसित पाए गए। जानिए ये जरूरी बातें..
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खुलासा: अब इन बीमारियों का शिकार हो रहे हैं आपके लाडले
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बच्चे हों या बड़े कोई भी दांतों की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम में शामिल एक सदस्य के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे दांतों की नियमित सफाई नहीं करते। इससे उनके दांत पाइरिया की चपेट में आकर खोखले हो रहे हैं।
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परीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि कई बच्चों के दांत गल चुके हैं। दंत रोग विशेषज्ञों का कहना कि फास्ट फूड और जंक फूड खाने से बच्चों के दांत खराब हो रहे हैं। ऐसे भोजन में चिपचिपा पदार्थ होने से दांतों को ज्यादा नुकसान हो रहा है। अभिभावकों को इस पर ध्यान देना होगा।
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इसके अलावा बच्चों का खानपान भी बदला है। बच्चे पोषक तत्व वाला खाना कम खा रहे हैं और फास्ट फूड ज्यादा खा रहे हैं। नेत्र ज्योति बढ़ाने के लिए विटामिन ए जरूरी है। लिहाजा खानपान में बच्चों को हरी सब्जियां अधिक खिलाएं।
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बच्चों में बढ़ते नेत्र रोग की वजह टीवी, कंप्यूटर और मोबाइल है। नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे लगातार टीवी के सामने बैठे रहते हैं। कंप्यूटर का इस्तेमाल भी बढ़ गया है। वीडियो गेम देखने को बच्चों में होड़ रहती है।
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आयरन आदि पोषक तत्वों की कमी से बच्चे एनीमिया की चपेट में आ रहे हैं। फास्ट फूड का बढ़ता प्रचलन भी इसकी वजह बन रहा है। बच्चों के खानपान पर खास तौर पर ध्यान देना होगा।
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निरीक्षण के दौरान प्राइमरी, मिडिल, हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में बच्चों का स्वास्थ्य जांच गया। बच्चों में दंत रोग अधिक पाया गया। 11 फीसदी बच्चे इसकी चपेट में हैं। एनीमिया (खून की कमी) बड़ी संख्या में बच्चों को गिरफ्त में ले रहा है। कान, नेत्र और चर्म रोग के शिकार भी बच्चे हो रहे हैं। हृदय रोगी भी बच्चे बन रहे हैं। शिमला जिले में 91 बच्चे हृदयरोग से पीड़ित मिले हैं। 71 बच्चों को मानसिक रोगी हैं।
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इसमें 1195 प्राइमरी, 386 मिडिल/ हाई और 251 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के 86,822 बच्चों की जांच की गई। इसमें 65902 बच्चे विभिन्न रोगों से ग्रसित पाए गए। लड़कियों की अपेक्षा लड़के बीमारियों से अधिक ग्रसित हैं।
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डाक्टरों के टिप्स -फास्ट फूड से परहेज करें। -दांतों की नियमित सफाई करें। रात को ब्रश करना जरूरी है। -कोई भी मीठा पदार्थ खाने के बाद कुल्ला जरूर करें। -दांतों के साथ ही मसूड़ों की नियमित मसाज करें
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आईजीएमसी अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि सरकारी स्कूलों के बच्चों का निशुल्क उपचार किया जाता है। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को भी बच्चों के स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच करवानी चाहिए। किसी भी बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। आईजीएमसी अस्पताल में सभी सुविधाएं उपलब्ध है।