हिमाचल में जंगलों की आग ने भीषण रूप ले लिया है। मंगलवार को चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी में आग बुझाते डिप्टी रेंजर समेत चार लोगों की जलने से दर्दनाक मौत हो गई। बीते दिन भी दो लोगों की जान चली गई थी।
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इस सीजन में जंगल की आग से मरने वालों का आंकड़ा सात पहुंच गया है। जानी नुकसान, करोड़ों की वन संपदा राख होने और सैकड़ों जीव-जंतुओं की अकाल मौत के बावजूद वन विभाग अभी तक नहीं जागा है।
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जंगलों को बुझाने के लिए अभी तक हेलीकाप्टर की सेवाएं लेने के बारे में सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है। चंबा के जोत में कैंथली वन बीट के बैंगला जंगल में लगी आग को टीम के साथ बुझाने पहुंचे डिप्टी रेंजर की जलने से मौत हो गई।
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घटना मंगलवार शाम की है। आग बुझाते पुखरी निवासी डिप्टी रेंजर अशोक कुुमार का पैर फिसल गया और आग में जा गिरे। बुरी तरह झुलसने से उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। डीएफओ डलहौजी राकेश कटोच ने घटना की पुष्टि की है।
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जिला कांगड़ा के संसारपुर टैरेस की गोरालधार पंचायत के गांव पट्टी के जंगल में लगी आग में बेरोजगार युवक सतविंद्र सिंह (24) जिंदा जल गया। एक अन्य युवक सुरिंद्र कुमार (35) बुरी तरह से झुलस गया। डीएसपी देहरा लालमन शर्मा ने हादसे की पुष्टि की है।
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उधर, जोगिंद्रनगर उपमंडल की खड़ीहार पंचायत में मंगलवार दोपहर झाडि़यों में लगी आग की लपटों में झुलसने से वृद्ध महिला रोशनी देवी की मौत हो गई है। आग की लपटों में महिला झुलस गई और उसकी मौके पर ही दम तोड़ दिया।
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जिला कुल्लू आनी की डिंगीधार पंचायत के ओडी गांव की रेगणू देवी (46) आईजीएमसी शिमला में जिंदगी की जंग हार गईं। आनी में प्राथमिक उपचार देने के बाद रेगणू को आईजीएमसी शिमला रेफर किया गया था। आग में करीब 80 प्रतिशत झुलसी रेगणू ने सोमवार रात 11 बजे दम तोड़ दिया।
सैन्य क्षेत्र कैंट के सटे जंगलों में मंगलवार को आग लग गई। श्रीनयना क्षेत्र के कनफारा गांव में आग लगने से 600 आम के पेड़ों का बगीचा राख हो गया। एक गोशाला भी राख हो गई है।