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झुग्गी-झोंपड़ी में गुजारा: नेशनल हॉकी खिलाड़ी रेहड़ी चलाने के लिए मजबूर

Sun, 21 Nov 2021 07:28 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
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नेशनल हॉकी खिलाड़ी नेहा सिंह। - फोटो : संवाद
हॉकी स्टिक संभालने वाले हाथ रेहड़ी संभालने के लिए मजबूर हैं। हॉकी की नेशनल खिलाड़ी नेहा सिंह छोटी बहन निकिता के साथ हमीरपुर के बाजार में फास्ट फूड की रेहड़ी लगाती है। कॉलेज की पढ़ाई और खेल के कॅरिअर को बीच में ही छोड़कर नेहा परिवार का पेट पालने के लिए रेहड़ी चलाने के लिए मजबूर है। कुछ महीने पहले नेहा के पिता चंद्र सिंह गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो गए। उनका टांडा मेडिकल कॉलेज में उपचार हुआ। वे कई महीनों से बिस्तर पर हैं। वे मछली कॉर्नर चलाते थे। पिता के बीमार होने पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी नेहा और उनकी छोटी बहन पर आ गई। छोटी बहन निकिता बीए कर रही है। भाई अंकुश बाल स्कूल हमीरपुर में पढ़ रहा है। मंडी जिले के कोटली के रहने वाले इस परिवार के पास जमीन भी नहीं है। इस वजह से नेहा झुग्गी-झोंपड़ी में परिवार के चार अन्य सदस्यों के साथ रह रही हैं। बाड़े में एक बकरी और मुर्गी है।
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- फोटो : संवाद
कुछ समय पहले ही उन्हें नगर परिषद हमीरपुर के वार्ड नंबर दस के पास सरकार ने चार मरले जमीन दी थी। नेहा की मां निर्मला देवी ने कहा कि अधिकारियों का तो हमें पूरा सहयोग मिल रहा है लेकिन बेटी को नौकरी न मिलने से उनकी विपदा दोगुना हो गई है। इतना कहते-कहते नेहा की मां की आंखों में आंसू आ गए। रुंधे गले से उन्होंने सरकार से बेटी के लिए नौकरी की मांग की। निर्मला का कहना है कि कमेटी की तरफ से घर के निर्माण के लिए सरकार की तरफ से पैसे दिलाए जाने की बात कही गई है, लेकिन अभी तक पैसे का प्रबंध नहीं हो पाया है। उन्होंने उधार लेकर मकान का निर्माण कार्य शुरू किया था, लेकिन अब यह काम भी पति के बीमार होने के बाद अधर में लटक गया है।
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- फोटो : संवाद
नेहा ने कहा कि अब खेल में कॅरिअर की उम्मीद नहीं है। अब सिर्फ परिवार के गुजारे के लिए वह मैच खेल लेती हैं ताकि कुछ पैसे मिल जाएं। आठवीं कक्षा के दौरान ही उनका चयन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के धर्मशाला हॉस्टल के लिए हुआ था। उसने राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। हॉकी में जूनियर वर्ग में दो नेशनल खेले। वेटलिफ्टिंग में पंजाब की तरफ से नेशनल स्पर्धा में हिस्सा लिया। उन्होंने सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द घर के निर्माण के लिए उन्हें पैसा दिया जाए। राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ियों को रोजगार भी दिया जाए।

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- फोटो : संवाद
कभी किसी टीम से खेलने के लिए नेहा को पैसे मिल जाते हैं। एक मैच खेलने के उन्हें 1500 रुपये मिल जाते हैं। इन पैसों को पिता के इलाज और परिवार के पालन पोषण पर ही खर्च करती हैं।
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PIC - फोटो : संवाद
नगर परिषद हमीरपुर के कार्यकारी अधिकारी किशोरी लाल ठाकुर ने कहा कि यह मामला उनके ध्यान में है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इस परिवार को घर निर्माण के लिए निदेशालय को प्रपोजल भेजी गई है। उम्मीद है जल्द मंजूरी मिलेगी।
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