हिमाचल में आग से तबाही, 8 जिलों में अलर्ट जारी, कई ट्रेनें लेट
Tue, 03 May 2016 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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उत्तराखंड के साथ-साथ हिमाचल के जंगल भी दहक रहे हैं। 12 में से आठ जिलों में आग इन दिनों जंगलों में तबाही मचा रही है। पिछले एक माह में सूबे में हजारों हेक्टेयर जंगल स्वाह हो चुके हैं। वन संपदा को अरबों का नुकसान हो चुका है। पिछले एक महीने में आग लगने के 378 मामले सामने आए हैं। वन विभाग ही नहीं, पुलिस भी अब अलर्ट पर है।
- फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के साथ-साथ हिमाचल के जंगल भी दहक रहे हैं। 12 में से आठ जिलों में आग इन दिनों जंगलों में तबाही मचा रही है। पिछले एक माह में सूबे में हजारों हेक्टेयर जंगल स्वाह हो चुके हैं। वन संपदा को अरबों का नुकसान हो चुका है। पिछले एक महीने में आग लगने के 378 मामले सामने आए हैं। वन विभाग ही नहीं, पुलिस भी अब अलर्ट पर है।
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कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द हैं। हर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जंगलों में आग थमने का नाम नहीं ले रही है। सोलन, शिमला, चंबा, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, ऊना और उत्तराखंड से सटे सिरमौर जिला जंगल की आग से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का कहना है कि सरकार सतर्क है। गर्मियों में आग लगती रहती है। उत्तराखंड जैसी कोई स्थिति हिमाचल में नहीं है।
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कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द हैं। हर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जंगलों में आग थमने का नाम नहीं ले रही है। सोलन, शिमला, चंबा, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, ऊना और उत्तराखंड से सटे सिरमौर जिला जंगल की आग से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का कहना है कि सरकार सतर्क है। गर्मियों में आग लगती रहती है। उत्तराखंड जैसी कोई स्थिति हिमाचल में नहीं है। (मंडी में आग से दहकते जंगल)
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शिमला-कालका हेरिटेज ट्रैक के इर्द-गिर्द के जंगल आग में दहक रहे हैं। सैलानियों के रोमांच से भरे सफर पर आग का खतरा मंडरा रहा है। सोमवार परवाणू से लेकर सोलन तक धर्मपुर के सनवारा, कोटी, बड़ोग और सोलन पंचपरमेश्वर में आग भड़क गई। ट्रैक पर पत्थर गिरने लगे। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए जगह-जगह ट्रेन रोक दी गई। सभी ट्रेनों को क्लीयरेंस मिलने के बाद ही हरी झंडी दिखाई गई।
- फोटो : अमर उजाला
शिमला-कालका हेरिटेज ट्रैक के इर्द-गिर्द के जंगल आग में दहक रहे हैं। सैलानियों के रोमांच से भरे सफर पर आग का खतरा मंडरा रहा है। सोमवार परवाणू से लेकर सोलन तक धर्मपुर के सनवारा, कोटी, बड़ोग और सोलन पंचपरमेश्वर में आग भड़क गई। ट्रैक पर पत्थर गिरने लगे। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए जगह-जगह ट्रेन रोक दी गई। सभी ट्रेनों को क्लीयरेंस मिलने के बाद ही हरी झंडी दिखाई गई।
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डीआरएम अंबाला प्रवीण द्विवेदी ने कहा कि सोलन में कोटी, सनवारा, बड़ोग और धर्मपुर के जंगलों में आग लगने की सूचना है। प्रभावित क्षेत्र रेलवे ट्रैक के इर्द-गिर्द हैं। सभी छह रेल प्रभावित हुई हैं। सभी यात्री सुरक्षित हैं।
- फोटो : अमर उजाला
डीआरएम अंबाला प्रवीण द्विवेदी ने कहा कि सोलन में कोटी, सनवारा, बड़ोग और धर्मपुर के जंगलों में आग लगने की सूचना है। प्रभावित क्षेत्र रेलवे ट्रैक के इर्द-गिर्द हैं। सभी छह रेल प्रभावित हुई हैं। सभी यात्री सुरक्षित हैं। (सोलन के जंगलों में भड़की आग)
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आग की घटनाओं के बढ़ने के साथ ही हिमाचल पुलिस भी अलर्ट हो गई है। एडीजीपी कानून व्यवस्था संजय कुंडू ने बताया कि सभी जिलों के एसपी को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही होमगार्ड, पुलिस व फायर बिग्रेड के अधिकारियों के साथ तालमेल बैठाकर स्थिति पर नजर रखने को कहा है।
- फोटो : अमर उजाला
आग की घटनाओं के बढ़ने के साथ ही हिमाचल पुलिस भी अलर्ट हो गई है। एडीजीपी कानून व्यवस्था संजय कुंडू ने बताया कि सभी जिलों के एसपी को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही होमगार्ड, पुलिस व फायर बिग्रेड के अधिकारियों के साथ तालमेल बैठाकर स्थिति पर नजर रखने को कहा है। (नाहन के जंगलों में रात को आग से मची तबाही)
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पिछले एक महीने में आग लगने के 378 मामले सामने आए हैं। जबकि पिछले साल कुल सीजन में 671 मामले सामने आए थे। इसके अलावा साल 2014-15 में 725, 2013-14 में 397 मामले और 2012-13 में 1798 मामले सामने आए थे।
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पिछले एक महीने में आग लगने के 378 मामले सामने आए हैं। जबकि पिछले साल कुल सीजन में 671 मामले सामने आए थे। इसके अलावा साल 2014-15 में 725, 2013-14 में 397 मामले और 2012-13 में 1798 मामले सामने आए थे। (फोटो में जिला मंडी में पहाड़ी पर भड़की भीषण आग)
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आग की सबसे ज्यादा आशंका चीड़ के जंगलों में होती है। चीड़ के जंगल ही हिमाचल में करीब 1 लाख 85 हजार हेक्टेयर में फैले हैं। प्रदेश को आग लगने के लिहाज से अति संवेदनशील, मध्यम संवेदनशील और संवेदनशील की श्रेणी में रखा है। करीब साढ़े तीन सौ बीट ऐसी हैं जिन्हें अतिसंवेदनशील की श्रेणी में रखा है जबकि 1020 को लो सेंसटिविटी और 667 को मीडियम सेंससिटिविटी जोन में रखा है।
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आग की सबसे ज्यादा आशंका चीड़ के जंगलों में होती है। चीड़ के जंगल ही हिमाचल में करीब 1 लाख 85 हजार हेक्टेयर में फैले हैं। प्रदेश को आग लगने के लिहाज से अति संवेदनशील, मध्यम संवेदनशील और संवेदनशील की श्रेणी में रखा है। करीब साढ़े तीन सौ बीट ऐसी हैं जिन्हें अतिसंवेदनशील की श्रेणी में रखा है जबकि 1020 को लो सेंसटिविटी और 667 को मीडियम सेंससिटिविटी जोन में रखा है।
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आग की घटनाओं से मचे हंगामे के बीच पीसीसीएफ एसपी वासुदेवा ने प्रदेशभर के वन संरक्षकों की बैठक बुलाई है। बैठक में घटनाओं को रोकने और उनसे निबटने को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा। साथ ही अधिकारियों को जरूरी निर्देश भी दिए जाएंगे। इसके साथ ही डिविजन स्तर पर आग रोकने के लिए टीमें गठित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इन टीमों को डीएफओ की निगरानी में संचालित किया जाएगा।
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आग की घटनाओं से मचे हंगामे के बीच पीसीसीएफ एसपी वासुदेवा ने प्रदेशभर के वन संरक्षकों की बैठक बुलाई है। बैठक में घटनाओं को रोकने और उनसे निबटने को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा। साथ ही अधिकारियों को जरूरी निर्देश भी दिए जाएंगे। इसके साथ ही डिविजन स्तर पर आग रोकने के लिए टीमें गठित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इन टीमों को डीएफओ की निगरानी में संचालित किया जाएगा। (चंबा के जंगलों में लगी आग का दृश्य)
पीसीसीएफ एसपी वासुदेवा का कहना है कि प्रदेश में वनों की आग को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर व्यवस्था की है। जीपीएस तकनीक की मदद ली जा रही है। फारेस्ट फायर अलर्ट मैसेजिंग सिस्टम के माध्यम से क्षेत्र विशेष के वन अधिकारियों-कर्मचारियों के मोबाइल फोन पर आग की सूचना का एसएमएस तुरंत पहुंच जाता है। गांव के स्तर पर कमेटियां बनाई गई हैं।
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पीसीसीएफ एसपी वासुदेवा का कहना है कि प्रदेश में वनों की आग को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर व्यवस्था की है। जीपीएस तकनीक की मदद ली जा रही है। फारेस्ट फायर अलर्ट मैसेजिंग सिस्टम के माध्यम से क्षेत्र विशेष के वन अधिकारियों-कर्मचारियों के मोबाइल फोन पर आग की सूचना का एसएमएस तुरंत पहुंच जाता है। गांव के स्तर पर कमेटियां बनाई गई हैं। (शिमला के तारादेवी के जंगलों में लगी आग की तस्वीर)