शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके सब्जी मंडी के पास सदर थाना में सिलेंडर फटने से आग लग गई। मामला राजधानी शिमला का है। अग्निकांड में थाने की सब्जी मंडी की ओर बनी दो कमरों की किचन की इमारत राख हो गई है। हादसे में मैस का एक लांगरी, दो होमगार्ड जवान और एक पुलिस जवान झुलस गए हैं। अग्निशमन विभाग ने आग को फैलने से रोक लिया लेकिन किचन में खाने बनाने के बर्तन और राशन राख हो गया। समय रहते आग पर काबू न पाया गया होता तो पूरा सब्जी मंडी समेत थाने के पुलिस जवानों की बैरकें भी आग में समा जाती। समय रहते पुलिस ने अग्निशमन विभाग को सूचित किया। अग्निशमन के जवानों ने आग पर काबू पाया और एक बड़ा हादसा टल गया।
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आग
सुबह करीब साढ़े सात बजे मैस के लांगरी ने करीब 90 जवानों के लिए दाल और चावल तैयार कर दिए थे और वह रोटियां बनाने की तैयारी कर रहा था। अचानक गैस का सिलेंडर खत्म हो गया। मैस में लांगरी के साथ दो होमगार्ड के जवान भी मौजूद थे। लांगरी ने सिलेंडर खत्म होने पर खाली सिलेंडर बदल कर नया सिलेंडर लगाया।
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आग
जैसे ही गैस ऑन कर लंागरी ने गैस को जलाने के लिए माचिस की तिल्ली जलाई गैस रिसाव के कारण सिलेंडर की पाइप ने आग पकड़ ली। रेगुलेटर ने आग पकड़ ली। लांगरी और होम गार्ड के जवानों ने आग बुझाने की कोशिश की। लांगरी दिलेर सिंह के दोनों हाथ झुलस गए साथ ही होम गार्ड के दोनों जवान अमर और संदीप भी आंशिक रूप से घायल हुए।
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सिलेंडर फटने के धमाके से मैस की छत में लगी चादर करीब सौ फीट दूर जा गिरी। मैस में आग भड़कते ही लांगरी और होम गार्ड के जवान चिल्लाने लगे। चिल्लाने की आवाजें सुनते ही बैरक में मौजूद पुलिस जवान मैस की तरफ गए और देखा की मैस से आग की लपटें उठ रही हैं। मैस की छत ने भी आग पकड़ ली थी।
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आग
पुलिस जवान आग की लपटों की बीच में घुसकर मैस से बर्तन बाहर निकालने लगे लेकिन कुछ ही मिनटों में सिलेंडर फटने का एक जोर का धमाका हुआ। देखते ही देखते मैस के साथ पुलिस जवानों की बैरक तक आग पहुंच गई। बैरक की एक खिड़की और एक जवान की रजाई में आग लग गई लेकिन पुलिस जवानों ने बैरक में लगी आग पर काबू पा लिया।
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आग
मैस में जवानों को खाने बनाने के लिए चार गैस से भरे सिलेंडर रखे हुए थे। अगर समय रहते अग्निशमन का दल पहुंच कर आग पर काबू न पाता तो बाकी गैस से भरे सिलेंडर भी आग पकड़ कर ब्लास्ट हो सकते थे। करीब आठ बजे थाने के दर्जनों जवान मैस में खाना खाकर अपनी अपनी ड्यूटी पर जाते हैं अगर आधे घंटे के बाद यह यह हादसा हुआ होता तो दर्जनों जवान आग की चपेट में आ सकते थे।
करीब डेढ़ साल पहले मैस का जीर्णोद्धार किया गया था। मैस में दो कमरे मौजूद थे एक कमरे में खाना बनाया जाता था और राशन रखा जाता था दूसरे कमरे में जवानों के खाना खाने के लिए डाइनिंग हाल था।