टीवी पर पीएम मोदी का बस एक भाषण देखकर इस इंजीनियर ने लाखों की नौकरी छोड़ उनका सपना साकार करने की ठान ली। इनका काम जानकर खुद पीएम को भी गर्व होगा। आइए जानते हैं आखिर कौन है पारस ठाकुर-
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हिमाचल के मंडी के रहने वाले पारस ठाकुर ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल हमीरपुर से वर्ष 2005 में जमा दो साइंस विषय में पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने एनआईटी हमीरपुर से मेकेनिकल विषय में बीटेक की।
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बीटेक की पढ़ाई के दौरान भी वह करीब दो साल तक हमीरपुर में निर्धन बच्चों को निशुल्क कोचिंग देते रहे। बीटेक करने के बाद वह मर्चेंट नेवी में बतौर इंजीनियर चले गए। लेकिन एजूकेशन और टीचिंग सेक्टर में गहरी रुचि और पीएम के सपने को साकार करने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
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पारस बताते हैं कि एक दिन उन्होंने टेलीविजन पर प्रधानमंत्री का भाषण सुना जिसमें उन्होंने देशहित में कम से कम एक साल सेवाएं प्रदान करने की बात सुनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों से पारस इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने 5 से 6 लाख रुपये पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी।
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पारस ठाकुर ने इसके बाद यू ट्यूब केनवस क्लासिज नाम से एक सॉफ्टवेयर बनाया जिस पर बच्चे अब ऑनलाइन केमिस्ट्री की निशुल्क पढ़ाई भी कर सकेंगे। वह भी बिल्कुल आसान तरीके और बिना किसी ट्यूशन फीस के। पहले पारस गरीब बच्चों को फ्री में पढ़ाते थे। लेकिन अब डिजिटल मोड के जरिए वे देश भर के बच्चों को इस विषय की बारिकियां बता रहे हैं।
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वह यू ट्यूब पर बच्चों से केमिस्ट्री के प्रश्न पूछते हैं और उनके जवाब देते हैं। उन्होंने 170 वीडियो अपलोड किए हैं, जिनमें स्टैंडर्डाइज मैटीरियल अपलोड किया, जिसमें केमिस्ट्री का कनसेप्ट आसान तरीके से समझाने का प्रयास किया गया है।
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पारस ठाकुर ने बताया कि वह वर्तमान में यू ट्यूब के जरिये दसवीं से लेकर 12वीं कक्षा तक पढ़ा रहे हैं। लेकिन आने वाले समय में वह छठी से लेकर 12वीं तक शिक्षा प्रदान करेंगे। इसके अलावा गांव-गांव में प्रोजेक्टर के माध्यम से भी बच्चों को केमिस्ट्री पढ़ाने की योजना है। वह गरीब बच्चों को आगे बढ़ता देखना चाहते हैं। पारस के पिता तेजेंद्र सिंह ठाकुर सरकारी कॉलेज से प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। जबकि माता सुनीता ठाकुर वर्तमान में भी बतौर टीचर सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
पारस यू ट्यूब पर केमिस्ट्री का ज्ञान बांट रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पढ़ाई का तरीका सही नहीं है। अगर स्कूलों में बेसिक ज्ञान बेहतर तरीके से प्रदान किया जाए तो कोई भी बच्चा किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रह सकता।