मजबूत इरादों और कड़ी मेहनत से दिव्यांग रजत कुमार युवाओं के रोल मॉडल बनते जा रहे हैं। दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद होनहार छात्र मुंह से पेन पकड़कर खुद परीक्षा देता है। उसने आज तक राइटर नहीं लिया। राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नीट) उत्तीर्ण करने के बाद अब कुल्लू जिले के आनी का रजत नेरचौक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करेगा। डॉक्टर बनने के बाद रजत पैरों से स्टेथेस्कोप पकड़कर मरीजों को चेक करेंगे।
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स्कूल में रहा है अव्वल
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छात्र रजत
- फोटो : अमर उजाला
रजत ने राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा-2019 में 150 अंक हासिल कर अपने मजबूत इरादे जाहिर कर दिए थे। अब रजत का चयन लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक के लिए हुआ है। रजत ने शारीरिक विकलांग स्टेट कोटे में 14वां रैंक हासिल किया है। रजत मेडिकल बोर्ड के सामने सोमवार को रू-ब-रू होगा। रजत के चयन से उसके माता-पिता बेहद खुश हैं। रजत पढ़ने-लिखने के अपने सारे काम पांव और मुंह के सहारे बिना किसी की मदद से करता है।
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रजत ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला द्वारा आयोजित परीक्षा में विज्ञान संकाय में 500 में से 404 अंक हासिल किए थे। रजत ने सभी परीक्षाएं अपने मुंह से पेन पकड़ कर बिना किसी की मदद से लिखी है।
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दसवीं की बोर्ड परीक्षा में भी रजत ने 700 में से 613 अंक हासिल किए थे। रजत मुंह से पेंट ब्रश पकड़कर बेहतरीन चित्रकारी भी करता है। स्कूल में पेंटिंग की हर प्रतियोगिता रजत ने ही जीती है। पिता शारीरिक शिक्षक जयराम और माता दिनेश कुमारी ने बताया कि रजत जब चौथी कक्षा में पढ़ता था तो अपने पैतृक गांव रडू में घर के आंगन में खेल रहा था।
उसी समय घर की छत के पास बिजली की एचटी लाइन से उसे जोरदार करंट लगा, जिससे उसके दोनों हाथ कंधे के बिलकुल पास से काटने पड़े थे। इसके बावजूद रजत ने हिम्मत नहीं हारी और मुंह और पांव से पेन पकड़कर लिखने का अपना कारवां जारी रखा।