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Exclusive: हिमाचल में बाढ़ का कहर, नदी में बहा 160 मीटर लंबा पुल, वीडियो

Fri, 12 Aug 2016 09:36 PM IST
हरसिमरन सिंह/अमर उजाला, कांगड़ा
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हिमाचल के जिला कांगड़ा के डमटाल-इंदौरा मार्ग पर चार दशक पहले बने 160 मीटर लंबे पुराना बाई अटारियां-कंदरोड़ी पुल को वीरवार दोपहर छौंछ खड्ड में आई बाढ़ बहाकर ले गई। पुल के 10 पिल्लरों समेत 76 मीटर हिस्सा पूरी तरह से ध्वस्त होकर तेज बहाव में बह गया। हालांकि, समय रहते वाहनों की आवाजाही बंद करने से कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। इंदौरा क्षेत्र का संपर्क पंजाब से कट गया है। उधर, वाहनों की आवाजाही काठगढ़ की तरफ मोड़ी गई, लेकिन मलोट पुल को भी बड़े वाहनों के लिए बंद कर दिया है।

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वीरवार दोपहर करीब 12 बजे यह पुल एकाएक नदी में बह गया। 1972 में बना यह पुल भारी बारिश के बाद आई बाढ़ की भेंट चढ़ गया। देखें पहले यह पुल बिल्कुल ठीक था। - फोटो : अमर उजाला
दोनों तरफ से मार्ग मार्ग बाधित होने से इंदौरा एक टापू में कैद हो गया है। छौंछ खड्ड पर बने पुल की नींव एक सप्ताह पहले आई बाढ़ में ही हिल गई थी। मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन ने बीते दिन ही बड़े वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी। वीरवार सुबह 11 बजे तक छोटे वाहन चल रहे थे। लोनिवि के अधिकारी मौके पर ही थे। जैसे ही एक पिल्लर दरका, दोनों तरफ से वाहनों का आवागमन पूर्ण रूप से बंद कर दिया। दोपहर 12.15 बजे तीन पिल्लर नीचे से खिसक गए। पुल का बीच का हिस्सा बैठ गया। 12.42 बजे बीच का दरका पूरा हिस्सा धराशाही हो गया और खड्ड में बह गया। इसके बाद एक-एक करके 10 पिल्लर पानी में समा गए। बाकी बचे पिल्लर भी लटक गए हैं।
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मगर चंद मिनट बाद ही यह बीच से झुकने लगा। - फोटो : अमर उजाला
तेज बहाव आने पर कभी भी गिर सकते हैं। एसडीएम नूरपुर राकेश प्रजापति, इंदौरा के तहसीलदार गौरव महाजन, इंदौरा थाना प्रभारी तिलकक राज, आईपीएच विभाग के एसडीओ विजय शर्मा मौके पर पहुंच गए थे। लोनिवि के अधिशाषी अभियंता मोहिंद्र पाल ने पुल गिरने की पुष्टि की है। उधर, वीरवार को जसूर की गरेली खड्ड का पानी रेलवे पुल के ऊपर से गुजर गया। पुल कभी भी बह सकता है। उधर, कांगड़ा के नगरोटा के साथ लगती पंचायत वासा के वासुदेव (64) गज खड्ड में भारी बहाव में आने के कारण करीब दस घंटों तक फंसे रहे।

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थोड़ी ही देर में यह पूरी तरह से धराशायी हो गया और बह गया। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने एक दिन पहले ही इसे वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया था। - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 1972 में छौंछ खड्ड पर बना यह पुल करीब 160 मीटर लंबा और 20 फ़ुट चौड़ा था। इस पुल के ध्वस्त होने से लोनिवि को करीब 10 करोड़ का नुकसान पहुंचा है। 44 साल पुराने पुल की मरम्मत पर करीब 90 लाख रुपये खर्च कर वाहनों की आवाजाही के लिए फिर से तैयार किया गया था। इंदौरा के तहसीदार गौरव महाजन की मौजूदगी में बीते बुधवार को लोनिवि ने छौंछ खड्ड पर बने इस पुल की मरम्मत की थी। पानी का रुख भी मोड़ा गया था, ताकि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से को नुकसान न पहुंचे। बावजूद इसके यह पुल वीरवार को छौंछ खड्ड में बाढ़ के पानी का तेज बहाव सह नहीं सका और धराशाही हो गया।
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वीरवार को इसे सिर्फ छोटे वाहनों के लिए खोला गया था। मगर जैसे ही बाढ़ आई इस पर आवाजाही बंद कर दी गई। - फोटो : अमर उजाला
बाई अट्टारिया औद्योगिक क्षेत्र में भी खतरा मंडरा रहा है। कभी भी पानी का रुख औद्योगिक क्षेत्र की तरफ रुख कर सकता है। औद्योगिक विभाग की ओर से बनाई क्रेटवाल भी बह गई है। खड्ड का पानी उद्योगों को छूकर पानी निकल रहा है। चंबा के भटियात में स्कूल जाते समय दसवीं कक्षा की छात्रा बन्नी खड्ड में करीब 200 मीटर तक बह गई। बच्ची ने बहादुरी दिखाते हुए खुद को संभाला और एक बड़े पत्थर पर चढ़ गई। इसके बाद वहां से गुजर रहे स्थानीय लोगों व अध्यापकों ने साथ मिलकर खड्ड का बहाव कम होने के बाद बच्ची को सुरक्षित निकाल लिया। बच्ची की पहचान आरती पुत्री चुनी लाल निवासी रेड़ पंचायत काहरी के रूप में हुई है।
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देखते ही देखते पुलिस बाढ़ में बह गया। यह नजारा यहां मौजूद लोगों ने कैमरे में भी कैद कर लिया। - फोटो : अमर उजाला
जिला सोलन के देहूंघाट में एक निर्माणाधीन भवन की छत दीवार सहित दरक गई है। सुबह हादसे के वक्त वहां कुछ मजदूर भी काम कर रहे थे। लेकिन वह हादसे में बाल-बाल बचे। चंबा शहर की मुख्य सड़क पर इरावती के पास सड़क किनारे लगे पेड़ की एक टहनी टूट कर नीचे गिर गई। जिससे सड़क पर आवाजाही कर रहे राहगीर टहनी की चपेट में आने से बाल-बाल बचे। टहनी पेड़ से गिरकर सीधे ही बिजली के तारों में गिरी और ट्रांसफार्मर में शॉर्ट सर्किट हो गया। रामपुर और किन्नौर में बुधवार रात बारिश होने से निगुलसेरी के पास एनएच-5 बंद रहा।
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ज्यूरी में स्कूल भवन का दीवार क्षतिग्रस्त होने से स्कूल भवन छात्रों के लिए खतरा बना हुआ है। हिल्स क्वीन शिमला में वीरवार दोपहर से मूसलाधार बारिश जारी है। प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में आगामी चार-पांच दिनों तक लोगों को भारी बारिश से कुछ राहत मिलेगी। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 17 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहेगा, लेकिन मूसलाधार बारिश से दौर थमेगा।  

 
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