हिमाचल के सीएम वीरभद्र की पत्नी के भतीजे ने तो पार्टी में दोस्तों का झगड़ा शांत करवा दिया था फिर क्यों उसकी हत्या की गई। इसकी पूरी कहानी सामने आ गई है। दोस्तों ने पुलिस पूछताछ में इसका खुलासा किया है।
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अकांक्ष ने करीब एक महीने पहले ही पार्टनरशिप में चंडीगढ़ के सेक्टर-9 में बूम बॉक्स कैफे खोला था। तभी से वह नियमित तौर पर इस शहर में रहने लगा था। वीरवार रात को एक पार्टी रखी थी जो उसकी मौत की वजह साबित हुई।
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इस पार्टी में फरीद सिंह और बलराज सिंह रंधावा भी पहुंचे थे। अकांक्ष के साथ उसका दोस्त शेरा भी आया था। पार्टी के दौरान फरीद और बलराज की शेरा के साथ पुरानी रंजिश को लेकर बहस हो गई। यह बहस हाथापाई तक पहुंच गई थी। उस समय तो बीच-बचाव करके मामला शांत करवा दिया गया।
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इसके बाद अकांक्ष सेन और उसका भाई अदम्य सिंह राठौड़ वहां से सेक्टर-18 चले गए। सुबह पांच बजे अकांक्ष ने एक दोस्त करन को सेक्टर-18 बुलाया और वे सभी सेक्टर-9 दोबारा यह देखने पहुंच गए कि उसके बाद कोई झगड़ा तो नहीं हुआ। उनको वहां देखते ही बलराज सिंह गुस्से में आ गया।
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इसी गुस्से के चलते उनमें फिर बोलचाल और बलराज ने अकांक्ष को कहा कि तू ज्यादा शेरा का बॉडीगार्ड बना फिरता है। ये कहते हुए वह बीएमडब्ल्यू कार में बैठा, उसके साथ फरीद बैठा हुआ था। बलराज ने तेज गति से बीएमडब्ल्यू कार अकांक्ष पर चढ़ा दी।
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एक बार टक्कर लगने से अकांक्ष गिर गया। फिर बलराज ने कार दोबारा उसके सिर पर चढ़ाई और फरार हो गया। उसके साथ फरीद सिंह भी था। उसके बाद अदम्य अकांक्ष को तुरंत पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर ले गया जहां उसकी मौत हो गई।
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वीरवार सुबह हुई घटना में घायल हुए आकांक्ष की मौत का कारण डॉक्टरों ने सिर में क्लॉट जमना बताया है। हालांकि मौत के सही कारणों का खुलासा शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद ही होगा।
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आकांक्ष के छोटे भाई की कुछ साल पहले एक सड़क हादसे में सोलन में मौत हो गई थी। अब परिवार में माता पिता और एक बहन रह गए हैं। मौत के बाद से आकांक्ष की मां रोती रही जबकि पिता गुमसुम होकर पुलिस कार्रवाई करने में जुटे हुए थे।
सूत्रों के मुताबिक इन दिनों घर में आकांक्ष की शादी के लिए प्लानिंग चल रही थी और घरवाले लड़की भी देख रहे थे। करीब 15 साल पहले इसी शाही परिवार ने करनाल-दिल्ली नेशनल हाईवे पर हादसे में 14 वर्षीय बेटे को खो दिया था। अब परिवार में इकलौती बेटी है, जिसका विवाह मध्य प्रदेश में हुआ है। हादसे ने पिता और मां निमी सेन के अपने इकलौते चिराग के विवाह के सपने को भी अधूरा छोड़ दिया।