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भूखे पेट सोने वाला आज है करोड़ों की कंपनी का मालिक

Sun, 05 Feb 2017 09:47 AM IST
सतीश डढवाल/अमर उजाला, देहरागोपीपुर (कांगड़ा)
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पंख होने से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है...। इन पंक्तियों को चरितार्थ कर दिखाया है चंडीगढ़ बेस्ड सीएस ग्रुप के फाउंडर एवं सीईओ छोटू शर्मा ने। आइए जानते हैं कैसे छोटू ने चपरसी से कंपनी मालिक तक का मुकाम हासिल किया।
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छोटू शर्मा ने बताया कि वर्ष 1998 में ढलियारा कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद उनके पास कंप्यूटर कोर्स करने के लिए 5000 रुपये भी नहीं थे। कहीं भी काम करने को कंप्यूटर कोर्स जरूरी था। छोटू शर्मा चंडीगढ़ पहुंच गए।
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काफी प्रयासों के बाद एक कंप्यूटर सेंटर में चपरासी की नौकरी की। यहीं से कंप्यूटर कोर्स किया और माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफाइड सॉफ्टवेयर डेवलपर बन गए। आज वह गरीब बच्चों की मदद करने के अलावा समाजसेवा में भी आगे हैं।

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छोटू शर्मा ने बताया कि मुझे इस मुकाम पर पहुंचने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। पैसे बचाने के लिए एक समय का खाना तक छोड़ दिया। शाम के समय बच्चों को उनके घर जाकर ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। चंडीगढ़ में साइकिल पर निकलता था।
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अपना कंप्यूटर तक नहीं था। दो साल तक बचत करने के बाद अपनी बाइक और कंप्यूटर खरीदा। इस कंप्यूटर से किराए के कमरे में कंप्यूटर सेंटर शुरू किया। छह माह में ही कंप्यूटर सेंटर में 80 बच्चों ने दाखिला लिया। बढ़ी आय से एक बड़ा हाल लेकर कंपनी की शुरुआत की।

 
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चपरासी की नौकरी से कॅरिअर शुरू करने वाले जिला कांगड़ा के नैहरनपुखर (दियाल पंचायत) के छोटू शर्मा की कंपनी का सालाना टर्न ओवर 10 करोड़ है। कभी भूखे पेट रहकर संघर्ष करने वाले हिमाचली युवक ने अपनी कंपनी में 150 लोगों को नौकरी दी है।
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वर्तमान में छोटू शर्मा एडवांस सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लैंग्वेज की एक हजार युवाओं को शिक्षा दे रहे हैं। उनकी फर्म देश-विदेश की बड़ी कंपनियों को सॉफ्टवेयर बनाकर देती है। वह युवाओं के रोल मॉडल बन गए हैं। उन्हें पिछले माह लुधियाना में एलएमए ट्राइडेंट फॉर यंग इनोवेशन इंटरप्रिन्योर अवार्ड से नवाजा गया है। इससे पहले प्रदेश सरकार भी हिमाचल गौरव अवार्ड से सम्मानित कर चुकी है।
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