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क्रिसमस के रंग में रंगी पहाड़ों की रानी शिमला, क्राइस्ट चर्च में 37 साल बाद बजी चाइम्स बेल

Wed, 25 Dec 2019 08:15 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
शिमला शहर के ऐतिहासिक क्राइस्ट और कैथोलिक चर्च में क्रिसमस पर्व धूमधाम से मनाया। शिमला शहर की पहचान व प्रतीक क्राइस्ट चर्च में दौरान 37 साल बाद क्रिसमस पर एबीसीडीईएफ जैसे म्यूजिक वाली चाइम्स बेल भी बजाई गई। बताया जाता है कि जब इशू मसीह का जन्म हुआ तो मसी लोग उन्हें ढूंढने निकले थे, जब इशू मिले थे तो यह बेल बजाई गई थी। शिमला के चर्च में इस बेल को 37 साल बाद बजाया गया। 
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- फोटो : अमर उजाला
बताया जाता है कि इसकी धुन बजने से बुरी शक्तियां दूर भागती हैं। चर्च के सदस्यों ने कहा कि यह बेल 1982 से खराब थी। इस इसे नहीं बजाया जाता था। अब इसे ठीक कर क्रिसमस पर बजाया गया। पास्टर पाल विक्की वेद ने कहा कि चाइम्स बेल की धुन पवित्र और मनमोहक है। चर्च के सदस्यों का कहना है कि यह बेल खुशी और शांति का प्रतीक है 
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- फोटो : अमर उजाला
इसलिए खास है चाइम्स बेल 
वर्ष 1844 में शिमला के क्राइस्ट चर्च का निर्माण किया गया था। 1899 में इंग्लैंड से जहाज में चाइम्स बेल को यहां लाया गया था। तब से चाइम्स बेल चर्च में प्रार्थना सभा के दौरान बताई जाती रही। इसके बाद यह खराब हो गई और इसकी रिपेयर नहीं हो पाई। क्रिश्चियन मेंबर विक्टर डीन ने 20 दिन की मशक्कत के बाद इसे रिपेयर किया। शहर के कारोबारी जगजीत सिंह ने मरम्मत के लिए सामान उपलब्ध करवाया। 

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चाइम्स बेल - फोटो : अमर उजाला
ब्रिटिश काल में लगाया गया पाइप आर्गन की धुन
बुधवार सुबह करीब 9 बजे से प्रार्थना सभा में ब्रिटिशकाल का पाइट आर्गन भी बजाया गया। इसकी धुन भी पवित्र मानी जाती है। चर्च के पादरी सोहनलाल ने कहा कि पाइप आर्गन एक पवित्र धुन यंत्र है। इसकी धुन से मनुष्य में सकारात्मक सोच रहती है।

 
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- फोटो : अमर उजाला
ऐसे बजती है जाइम्स बेल 
चाइम्स को हैमर के साथ जोड़ा जाता है। निचले भाग से खींचने पर हैमर चाइम्स की पाइप पर चोट करता हैं। ये चाट एक साथ की जाती है, जिससे प्रार्थना सभा के दौरान इसकी आवाज गूंज उठती है। खास बात यह है कि इसकी आवाज अन्य तरह की घंटी से कहीं उलट होती है। इसमें एक ही समय में अलग-अलग तरह की धुन सुनाई देती है। 
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- फोटो : अमर उजाला
क्रिसमस पर शहर के चर्च में प्रार्थना सभा का आयोजन कर विश्वशांति की कामना की गई। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। लोगों ने यीशु मसीह को याद कर उनके मानव सेवा में दिए योगदान की चरचा की। वहीं चर्च के पास और रिज मैदान पर सांता क्लॉज बने लोगों ने बच्चों को टाफियां तथा चाकलेट बांटीं। लोगाें ने इस दौरान भाईचारे और नशा मुक्त हिमाचल बनाने की शपथ भी ली। 
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- फोटो : अमर उजाला
महिलाओं ने प्रभु यीशु की स्तुति की। इस दौरान पूरा चर्च ये यीशु प्यार का सागर है..... गीत से गूंज उठा। पादरी सोहन लाल ने  प्रार्थना सभा करवाई। चर्च के भीतर ब्रिटिशकाल में लगाया पाइप आर्गन भी बजाया गया। सुबह नौ बजे से प्राथर्ना सभा शुरू हुई और 12 बजे तक चलती रही। 11 बजे मुख्य अतिथि राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय क्राइस्ट चर्च पहुंचे तथा लोगों को क्रिसमस पर्व की बधाई दी। 

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- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि भगवान यीशु ने मानव कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। बाइवल में मानव जीवन की हर जानकारी सच्ची है जो भगवान यीशु द्वारा रचित है। राज्यपाल ने कहा कि युवा को इन ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए ताकि युवा नशे से दूर रहें। एक बजे लोगों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। क्राइस्ट चर्च के पादरी सोहन लाल ने बताया कि इस दौरान आपसी भेदभाव खत्म करने और विश्व शांति के लिए दुआएं की गईं।

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- फोटो : अमर उजाला
दुल्हन की तरह सजा था कैथोलिक चर्च 
कैथोलिक चर्च में भगवान यीशु के जन्म का चित्रण भी शानदार ढंग से किया था। चर्च को दुल्हन की तरह सजाया था। चर्च के अंदर प्रभु यीशु की झांकी बनाई गई थी। इसमें प्रभु के जन्म को एक गोशाला में हुआ दिखाया है। वह एक घास फूस की झोंपड़ी थी। चर्च के अंदर घास की झोंपड़ी तैयार की थी, जिसके अंदर प्रभु के विभिन्न रूपों को दिखाया था। पूरे चर्च के अंदर मोमबत्ती और सांता क्लॉज के टेडी लटकाए थे।   

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डीजे की धुनों पर थिरके पर्यटक 
वहीं,  पर्यटन नगरी मनाली में क्रिसमस ईव की धूम रही। मनाली में क्रिसमस के मौके पर देशभर से पर्यटकों का सैलाब उमड़ा। ढोल-नगाड़ों की थाप पर कुल्लवी नाटी के साथ डीजे की धुन पर सैलानी जमकर थिरके। हालांकि पिछले दो साल से मनाली में क्रिसमस क्वीन प्रतियोगिता का आयोजन नहीं किया जा रहा है।  पर्यटन निगम की ओर से क्रिसमस के मौके पर क्लब हाउस मनाली में आयोजित विशेष कार्यक्रम में पर्यटकों का कुल्लवी परंपरा के अनुसार स्वागत किया। इस दौरान सैलानियों के लिए लोकल सिड्डू के साथ पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। 
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इसके लिए पर्यटन निगम ने क्लब हाउस मनाली में फूड कोर्ट खोला था। बच्चों को फास्ट फूड की भी व्यवस्था की गई। मनाली में क्रिसमस को लेकर देर रात तक जश्न चलता रहा। मनाली पुलिस ने भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। होटलों में लाइव म्यूजिक व डीजे के अलावा सैलानियों ने कपल और लेमन डांस का आनंद लिया। हालांकि इस साल सैलानी व्हाइट क्रिसमस का आनंद नहीं उठा पाए। लेकिन नेहरूकुंड, पलचान, कोठी से लेकर सोलंगनाला तक पर्यटकों ने बर्फ के बीच खूब मस्ती की। पर्यटकों ने बर्फ के बीच क्रिसमस को पूरे उत्साह के साथ मनाया।
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