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भारतीय डॉक्टरों का खुलासा, स्मार्टफोन से बच्चे हो रहे इस बीमारी का शिकार

Mon, 20 Mar 2017 04:29 PM IST
राजेंद्र चौधरी/अमर उजाला, मौहल (कुल्लू)
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स्मार्ट फोन, टीवी, कंप्यूटर और लैपटॉप की हाई रेसोल्यूशन स्क्रीन आपके बच्चों की आंखों का पानी कम रही है। इससे बच्चे छोटी उम्र में ही दृष्टि दोष के शिकार हो रहे हैं। नेत्र परीक्षण में यह खुलासा हुआ है कि छह से 19 वर्ष आयु वर्ग के 25 फीसदी बच्चे ड्राई आई सिंड्रोम की बीमारी से ग्रस्त हैं। हाई रेसोल्यूशन स्क्रीन की चमक आंखों के लुब्रीकेंट (तरलता) को खत्म कर रही है। 
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इसका कारण बच्चों का स्मार्ट फोन में लगातार गेम खेलना, ज्यादा देर टीवी देखना और लैपटॉप का अधिक प्रयोग करना है। दृष्टि विज्ञान में उत्तर भारत के प्रथम परास्नातक (सरकारी क्षेत्र), विजन-2020 के लेखक व वरिष्ठ नेत्र विज्ञान अधिकारी डॉ. कर्ण सिंह गुलेरिया (54) ने इसका खुलासा किया है।
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वे पिछले 30 वर्षों से आंखों की कार्य करने की क्षमता, उससे जुड़े अन्य पहलुओं और आधुनिकता का आंखों पर पड़ने वाले प्रभाव पर शोध कर रहे हैं। उनकी मानें तो आमतौर पर आंखों की जांच के लिए 60 आयु वर्ग से अधिक के लोग नेत्र परीक्षण केंद्र में आते थे, लेकिन बदलते परिवेश में 6 साल तक के बच्चे भी आंखों की जांच के लिए पहुंच रहे।

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पिछले कुछ सालों में इनकी तादाद 20 से 25 फीसदी बढ़ गई है। विशषेज्ञ के अनुसार आमतौर पर आंखें एक मिनट में 14 से 18 बार झपकती हैं, लेकिन जब मनुष्य हाई रेसोल्यूशन स्क्रीन को लगातार देखता है तो यह प्रक्रिया एक मिनट में सात से नौ बार तक रह जाती है। इस कारण टियर ग्लैंड से निकलने वाला लुब्रीकेशन कम हो जाता है।
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स्मार्ट फोन के अधिक इस्तेमाल से 6 से 19 वर्ष की आयु वाले बच्चों की आंखों में ड्राई आई सिंड्रोम का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है। गुलेरिया के लिखित विजन 2020 के शोधपत्र डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा से छपने वाले सब हिमालयन जरनल ऑफ हेल्थ रिसर्च के वॉल्यूम 3 के अंक में छप चुके हैं।
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ड्राई आई सिंड्रोम और कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षणों में आम तौर पर आंखों में जलन और दर्द महसूस होती है। आंखें झपकने में भी समस्या रहती है। ऐसी हालत में मरीजों को विशेषज्ञ की राय लेना जरूरी है।
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टियर ग्लैंड से निकलने वाला तरल पदार्थ आंखें झपकने में मदद के साथ आंखों की लुब्रीकेशन भी करता है। लगातार चमकदार स्क्रीन देखने से ल्यूब्रीकेशन नहीं हो पाती जोकि आंखों के लिए खतरनाक है।
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किसी भी हाई रेसोल्यूशन एलईडी स्क्रीन को देखने के लिए एआरसी लेंस युक्त चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए। यह 50 प्रतिशत तक ग्लेयर को कम करता है। स्मार्टफोन, टीवी, लैपटॉप और कंप्यूटर देखते वक्त बीच-बीच में हथेलियों से आंखों पर हल्की मालिश करें या फिर पानी से आंखों को साफ करते रहना चाहिए। आंखें झपकने की प्रक्रिया पर ध्यान दें। स्क्रीन की रेसोल्यूशन कम करके रखें।
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