ज्योतिष शोधार्थी और एस्ट्रोलॉजी एक विज्ञान रिसर्च पुस्तक के लेखक गुरमीत बेदी।
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गुरमीत बेदी ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा पर 130 साल बाद ऐसा योग बन रहा है। वहीं शनि स्वराशि कुंभ में विराजमान हैं। गुरु, बुध और सूर्य मेष राशि में रहेंगे। बुध और सूर्य मिलकर बुधादित्य योग बनाने जा रहे हैं। 5 मई को लग रहा चंद्र ग्रहण उपच्छाया चंद्रग्रहण होगा। साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। लेकिन यह चंद्र ग्रहण वैशाख पूर्णिमा यानी बुद्ध पुर्णिमा पर लगेगा। इसलिए इसका खास महत्व है। इस दिन कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं जो कि कई राशि के जातकों के जीवन में धनलाभ और तरक्की के योग बना रहे हैं। चंद्र ग्रहण क्यों लगता है, इसके बारे में वैज्ञानिक रूप से कहा जाए तो पृथ्वी, सूर्य के चक्कर लगाती है और चंद्रमा, पृथ्वी के चक्कर लगाता है। इसी चक्कर के बीच एक समय ऐसा आता है जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के बीच में आ जाती है। इस स्थिति में ये तीनों एक सीध में आ जाते हैं। जिस वजह से सूर्य की किरणे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती हैं और इसी वजह से चंद्रमा पर ग्रहण लग जाता है। आसान भाषा में कह सकते हैं कि जब पृथ्वी, चंद्रमा को ढक दे तो समझ लें कि चंद्र ग्रहण लग गया है।