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कागज खाकर भरा पेट, ताउम्र याद रहेगी जिंदगी की ये जंग

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10 दिन....10 रातें और 211 घंटे 47 मिनट। जमीन के नीचे घुप अंधेरी टनल में जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे दो मजदूर आखिरकार जिंदा लौट आए। मौत को मात देकर दस दिन के बाद इन्होंने सूरज देखा। आइए जानते हैं पूरी कहानी...
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कागज खाकर भरा पेट, ताउम्र याद रहेगी जिंदगी की ये जंग

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12 सितंबर को रात 8.30 बजे हिमाचल के बिलासपुर के टीहरा में निर्माणाधीन टनल धंसी। तीन मजदूर इसमें फंस गए। टनल में मलबा इतना गिरा कि सभी मानने लगे कि तीनों शायद ही जिंदा होंगे।
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देर रात ही बीआरओ, जिला प्रशासन ने शुरू किया रेस्‍क्यू ऑपरेशन। उम्मीद जगी कि शायद कोई मजदूर जिंदा रह गया हो।

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एक दिन, दो दिन और फिर चार दिन बीत गए। टनल के अंदर मलबा निकालने का काम जारी था। मगर अब तक किसी मजदूर की कोई खबर नहीं थी। उम्मीद अब पूरी तरह टूट चुकी थी। सेना और एनडीआरएफ ने भी हाथ खींच लिए।
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पांचवें दिन, बीआरओ का काम जारी था। अब पहाड़ी के उपर से छेद कर कैमरे टनल में डाले गए। 96 घंटे बाद तो जैसे चमत्कार हो गया।
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अंधेरी टनल में फंसे दो मजदूर जिंदा मिल गए। वहीं, टनल में बंद मणि राम और सतीश तोमर को अब जीने की उम्मीद मिल गई।
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फिर काम जोरों पर चल पड़ा। टनल के रास्ते मलबा निकालने का काम लंबा था। इसीलिए फैसला लिया गया कि टनल के उपर से पहाड़ी में छेद कर टनल तक पहुंचा जाएगा। मजदूरों को खाना पानी मिलने लगा था।

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पहाड़ी से होल करने के लिए राजस्‍थान से आधुनिक ड्रिलिंग मशीन मंगाई गई।

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मगर काम आसान नहीं था। इसी बीच आड़े आई चट्टानें। इससे इंतजार लंबा हो गया। रेस्‍क्यू ऑपरेशन दसवें दिन तक ‌खिंच गया। उधर, टनल में बंद मजदूर अब छटपटाने लगे थे।

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आखिरकार दसवें दिन मुरझाए चेहरों पर अचानक रौनक लौट गई। 211 घंटे बाद दोनों मजदूर जिंदा बाहर निकाल लिए गए।

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मौत से जंग लड़ रहे मजदूरों सतीश व मणिराम को निकालने के लिए एनडीआरएफ का जवान उनके पास पहुंचा, तो मजदूरों ने उसे जफी डाल दी। मजदूर एनडीआरएफ के जवान अशोक को बोले -संकट से निकालने वाले तुम हो हमारे असली भगवान।

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बाहर निकलते ही दोनों मजदूरों ने हाथ हिलाकर सबका अभिवादन भी किया।

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पूरा माहौल जोश से भर गया। जय मां ठाई देवी, जय माता दी और विश्वकर्मा भगवान के जयकारे से माहौल गुंजायमान हो गया। दोनों के बाहर निकलने के बाद इंजीनियरों और वर्करों ने एक-दूसरे को गले मिलकर बधाई दी। वहीं मजदूरों के परिजनों की खुशी का भी ठिकाना नहीं रहा।

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दस दिनों से मौत को मात दे रहे मणिराम के जिंदा बाहर निकालने की खबर सुनते ही नलवागी पंचायत के करेरी गांव में परिजन खुशी में झूमे उठे।

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इस बात की खबर मिलते ही गांव के लोग परिजनों को बधाई देने के लिए पहुंचे। मणिराम की माता बोधी देवी, पत्नी जयदासी, बेटी डोलमा और बेटा दिनेश कुमार दस दिनों तक अंधेरी टनल में रहे मणि राम के सुरक्षित रहने को देवी-देवताओं का आशीर्वाद मानते हैं।

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बाहर निकालने के बाद दोनों को 108 एंबुलेंस (एचपी-63-5801) से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जहां दोनों का उपचार चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों मरीज स्वस्थ है। डीसी मानसी सहाय ठाकुर ने कहा कि रेस्क्यू अभी जारी है। तीसरे मजदूर की तलाश की जा रही है।

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टनल में उतरे जवान अशोक ने कहा कि उन्होंने कई रेस्क्यू ऑपरेशन किए हैं। कई लोगों की जानें बचाई है। इससे उसे दिली खुशी मिलती है। लेकिन, इस बार का ऑपरेशन पहले से खतरनाक। पहली बार वह जमीन के अंदर किसी टनल में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए उतरे। यह लम्हा उन्हें ताउम्र याद रहेगा।

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दोनों जिंदा लौटे मजदूर इन लम्हों को शायद ही कभी भूल पाएंगे। साथ में बिताए वो लम्हें भी ‌जब दोनों जिंदा रहने के लिए कागज और टनल में भरा गंदा पानी तक पीने को मजबूर हुए थे।
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वहीं टनल में फंसे तीसरे मजदूर हिरदा राम का कोई सुराग नहीं लग पाया है। जिला प्रशासन और एनडीआरएफ ने उसके लिए अब सर्च ऑपरेशन चलाने की बात कही है।
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