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तस्वीरें: यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद बीमार, कहीं ताला तो कहीं डॉक्टर नहीं

Wed, 10 Jan 2018 03:03 PM IST
सुमित ठाकुर/नरेश भारद्वाज, अमर उजाला, शिमला
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राजधानी में चल रहे पीएचसी खुद बीमार हैं। यहां दवाइयां हैं और न ही डॉक्टर। कई केंद्रों पर ताले लटके हैं। कुछ पीएचसी में खांसी, बुखार तक की दवा नहीं। जहां डॉक्टर हैं, वो अपनी मर्जी से ड्यूटी बजा रहे हैं। कई स्वास्थ्य केंद्र राम भरोसे चल रहे हैं।
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यहां स्टाफ का टोटा है। जहां पूरी सरकार और विभाग के अफसर बैठते हैं। वहीं बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों का दम निकल चुका है। अमर उजाला ने  शहर के स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा किया। इस दौरान केंद्रों में कई खामियां उजागर हुईं। कहीं दवा तो कहीं डॉक्टर नहीं मिले। मरीजों को केमिस्ट की दुकानों से दवाइयां खरीदने को मजबूर होना पड़ा।  पेश है ये रिपोर्ट
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संजौली पीएचसी 
संजौली पीएचसी में स्टाफ पहुंच चुका है। निजी संस्थान में कार्य कर रही अनीता भी डॉक्टर का इंतजार कर रही हैं। हेल्थ सुपरवाइजर मरीजों को दवाइयां और फर्स्ट एंड मुहैया करवा रही हैं। साढ़े दस बजे पीएचसी के बाहर गाड़ी खड़ी होती है। कार से एक आदमी बाहर निकलता है और पूछता है कि कमरा कहां है। हेल्थ सुपरवाइजर ने कहा कि यहां कुर्सी है आप बैठिए। व्यक्ति से पूछने पर कहा कि वह मशोबरा में कार्यरत है। लेकिन जब तक डॉक्टर साहब यहां पहुंचे तो अनीता लौट चुकी थी। 

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न्यू शिमला पीएचसी
मंगलवार सुबह 10:10 मिनट पर टीम न्यू शिमला के सेक्टर दो स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंची। डॉक्टर से पहले ही मरीज भी यहां पहुंच गए, लेकिन डॉक्टर नहीं पहुंचे। इससे पहले केबिन की ओर बढ़े तो स्टाफ ने रोेक दिया। कहा कि डॉक्टर साहब छुट्टी पर हैं, आज नहीं आ पाएंगी। आपको बुधवार को ही आना होगा। इसके बाद यहां आए मरीज लौट गए। दिन भर केंद्र में इसी तरह का सिलसिला चलता रहा। डॉक्टर की वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण न्यू शिमला से इलाज के लिए आए मरीज दिन भर दिक्कतें ही झेलते नजर आए।
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hospital shimla
विकासनगर पीएचसी
विभाग यहां पीएचसी के लिए भवन नहीं बना सका है। मंदिर में केंद्र चल रहा है। मंदिर को जाने वाले रास्ते के बीच से ही यू टर्न लेना पड़ता है। मरीजों की गलती इतनी होती है कि वह आगे बढ़ जाता है और मंदिर के मुख्य द्वार पहुंच जाता है। गलती का अहसास होने पर लौटता है। सीढ़ियां उतरता है और तब ही केंद्र पर पहुंच पाता है। पता चलता है कि स्वास्थ्य केंद्र पर खांसी और बीपी की दवा ही नहीं है। महकमा दवाएं भेजना ही भूल गया। केंद्र में यह स्थिति कुछ समय से है। 
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मैहली पीएचसी 
मैहली स्कूल से चंद कदमों की दूरी पर स्वास्थ्य महकमे ने उपस्वास्थ्य केंद्र खोला है, लेकिन आज यहां ताला लटका है। कई लोग आए भी लेकिन वह लौट गए। जो कर्मी यहां पर सेवाएं दे रही हैं। उन्हें भी लोगों ने फोन कर आने की जानकारी लेनी चाही। उन्होंने आज आने से मना किया। बताया गया कि उनकी कहीं ओर ड्यूटी लगी है। इसलिए बीपी और शुगर चेक करवाने आए मरीज लौट आए।
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दोनों हेल्थ वर्कर छुट्टी, कैल्शियम-आयरन भी नहीं 
मल्याणा के नजदीक बखराई में दूसरा उप स्वास्थ्य केंद्र पहाड़ी पर खोला गया है। इस स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत दोनों हेल्थ वर्कर छुट्टी पर है। पूछने पर पता चला कि जिस हेल्थ वर्कर की ड्यूटी यहां लगाई गई है। उसे मैहली से यहां पर बुलाया गया है। इसी बीच बड़ों को दी जाने वाली आयरन और कैलशियम दवाएं भी यहां नहीं है। जबकि आसपास की जगहों पर बने घर पर यदि कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है तो यहां पर ही प्राथमिक उपचार के लिए आता है। जबकि दूसरी ओर भट्टाकुफर से ढली टनल होने के बाद स्वास्थ्य केंद्र संजौली में आता है। ऐसे में कई किलोमीटर के फेर और पूरे मल्याणा क्षेत्र में यही सरकारी केंद्र है जहां पर मरीजों को यह दवाएं उपलब्ध करवाई जाती है। 

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आर्डर भेजा है, सप्लाई आने के बाद बांटी जाएगी दवा 
दवाइयों के लिए सप्लाई आर्डर भेजे गए हैं। सप्लाई आने के बाद सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाएं बांट दी जाएंगी। स्टाफ की कमी के बारे में कहा कि 28 जनवरी को टीकाकरण अभियान होगा। हेल्थ वर्करों को डीडीयू में इसकी जानकारी दी जा रही है। शायद इसको लेकर कही कोई कर्मी नहीं आ पाया हो।
- डॉ. नीरज मित्तल, - मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला शिमला
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कसुम्पटी पीएचसी
दिन मंगलवार, सुबह 9:30 बजे। दावा किया गया कि रोजाना सौ के करीब ओपीडी होती है। ऐसे में सभी मरीजों को उपचार मिले इसलिए पहले आ गए। हालांकि दवाओं के बारे में पूछे जाने पर कहा कि खांसी, बुखार की दवाएं उपलब्ध है। बाकी का स्टॉक दो दिनों के भीतर पहुंच जाएगा।
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