इतना ही नहीं गण, राशि, योनि, तारा आदि दोष भी समाप्त हो जाते हैं। किसी भी राशि या लग्न के नौवें भाग को नवांश कहते हैं। नवांश कुंडली से अभिप्राय किसी भी राशि या लग्न का नौवें भाग से है। विवाह मुहूर्त की लग्न पत्रिका के शोधन में विवाह लग्न में नवांश का विशेष महत्व है। प्राय: विवाह मुहूर्त में नवांश के गणित की जटिल प्रक्रिया एवं अनभिज्ञता के कारण विवाह लग्न में इसकी उपेक्षा हो रही है।