हिमाचल की मणिकर्ण घाटी के रशोल-मलाणा ट्रैक पर बर्फ में फंसे दिल्ली के पांच में से दो छात्रों की मौत हो गई है। करीब 23 घंटे बाद इन्हें रेस्क्यू किया गया लेकिन कुल्लू अस्पताल पहुंचने के बाद दो ने दम तोड़ दिया। तीन छात्रों की हालत अभी नाजुक बनी हुई है। ये कुछ भी बता पाने की हालत में नहीं हैं।
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बताया जा रहा है कि बीते बुधवार दोपहर बाद आईसीआई संस्थान दिल्ली के नेपाल मूल के छात्र विकास, नितेश, वीतपरा, अर्जुन और संतोष मणिकर्ण घाटी के रशोल से ऐतिहासिक गांव मलाणा के लिए ट्रैक पर निकले थे। चार घंटे बाद सभी रशोल टॉप पर पहुंचे तो यहां तीन फीट बर्फ थी।
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इसी दौरान ताजा बर्फबारी भी शुरू हो गई, जिससे मुश्किलें और भी बढ़ र्गइं। भारी बर्फबारी के बीच रात के अंधेरे में इन्हें सुरक्षित जगह भी नहीं मिल पाई। टॉप से 100 मीटर नीचे एक पेड़ के नीचे सभी अंधेरे में बैठे रहे।
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कड़ाके की ठंड व सर्द हवाओं से खुद को बचाने के लिए इन्होंने चार स्लीपिंग बैग और कपड़ों को जलाया लेकिन आग ज्यादा देर नहीं टिकी।
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बुधवार रात मोबाइल बंद होने से पहले ट्रैकरों ने रास्ते से भटकने की सूचना 100 नंबर पर पुलिस को दे दी थी। भूख-प्यास और कड़ाके की ठंड से सुबह होने पर जब दो छात्रों की स्थिति बेहद नाजुक हुई तो अन्य तीनों छात्र घबरा गए।
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रेस्क्यू टीम पहुंचने के बाद इनकी जान में जान आई पर अस्पताल पहुंचकर दो छात्रों ने दम तोड़ दिया। एसडीएम कुल्लू रोहित राठौर ने बताया कि दो छात्रों की मौत हो गई है।
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अन्य तीन छात्र अभी कुछ भी बता पाने की हालत में नहीं है। लिहाजा, मृतक छात्रों की पहचान के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।
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बर्फ में फंसने के बाद ट्रैकरों ने 100 नंबर पर फोन कर सहायता मांगी थी। इसके बाद पुलिस व रेस्क्यू टीमें तलाश के लिए निकलीं।
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एसएचओ लाल सिंह चौकी प्रभारी पतलीकूहल, एचसी उतम चंद, ओमप्रकाश, तारा चंद, दीपक, तरुण कुमार, इंद्र सिंह, गृहरक्षक अनिल, हिमालयन रेस्क्यू के नेगी बद्रर्स के छापे राम सहित 12 सदस्यों ने मलाणा व रशोल से ट्रैकरों को तलाशने के लिए ऑपरेशन चलाया। काफी मशक्कत के बाद इन्हें तलाश किया गया।