ऊंचाई 11,965 फीट। 12 से 15 फीट बर्फ की सफेद चादर। हाड कंपकंपा देने वाली ऐसी ठंड में रुकने की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता लेकिन आस्था और योग साधना से चूड़धार में तीन जिंदगियां जीवन यापन कर रही हैं।
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ब्रह्मचारी स्वामी कमलानंद गिरि बर्फ के टीले पर योग साधना में लीन हैं जबकि मंदिर के पुजारी पंडित कृपाराम शर्मा व शिष्य काकूराम भी स्वामी की सेवा व भगवान शिरगुल महाराज की भक्ति में लीन होकर बर्फ के बीच गुजर बसर कर रहे हैं।
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ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, जब ब्रह्मचारी कमलानंद जी महाराज चूड़धार (सिरमौर, हिमाचल प्रदेश) में बर्फबारी के बीच आस्था में लीन हैं। मौसम कोई भी हो, यहां तक कि बर्फ के बीच भी पिछले कई सालों से स्वामी कमलानंद आस्था में लीन रहते आए हैं।
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चूड़ेश्वार सेवा समिति के प्रबंधक बाबूराम शर्मा ने बताया कि चूड़धार में इस समय 12 फीट के आसपास बर्फ गिर चुकी है। चोटी पर तीन लोग मौजूद हैं। सभी सकुशल हैं। तीनों के लिए खाने का इंतजाम किया गया है। आश्रम से मंदिर पहुंचने के लिए बनाई है सुरंग।
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बर्फ पिघलाकर पीने के पानी का इंतजाम किया जा रहा है। आश्रम में चार महीने पहले ही जरूरी सामान जुटा लिया गया था। लकड़ी व खाद्य सामग्री की व्यवस्था करने के साथ जनरेटर की सुविधा उन्होंने बताया कि मार्च-अप्रैल माह तक चूड़धार जाने पर रोक लगाई गई है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे चूड़धार जाने की कोशिश न करें।
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चूड़धार में प्राचीन शिरगुल मंदिर का हाल ही में जीर्णोद्घार किया गया है। पहले की अपेक्षा अब प्राचीन मंदिर की ऊंचाई 25 फीट के आसपास है। लिहाजा, मंदिर का आखिरी छोर बर्फ में नहीं डूबा है। मंदिर में पूजा अर्चना का कार्य जारी है।
आश्रम से प्राचीन शिरगुल मंदिर तक पहुंचने के लिए नवंबर व दिसंबर महीने में ही सुरंग बना ली गई थी। ब्रह्मचारी स्वामी कमलानंद के आश्रम में अपने आसन से मंदिर के मुख्य पूजा स्थल तक की दूरी 20 से 25 मीटर के करीब है।