शिमला-कालका हेरिटेज रेलवे ट्रैक पर मंगलवार को ‘रेलवे का इतिहास’110 साल पुराना स्टीम इंजन दौड़ाया गया। यह एक बड़ा मौका था जब अंग्रेजों के जमाने का इंजन ट्रैक पर दौड़ा। रिपोर्ट: विश्वास भारद्वाज, नरेश भारद्वाज
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हेरिटेज ट्रैक पर दौड़ा 110 साल पुराना स्टीम इंजन, देखें
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शिमला से कैथलीघाट तक करीब 22 किलोमीटर की दूरी स्टीम इंजन ने एक घंटा दस मिनट में तय की। शिमला से कैथलीघाट और वापस शिमला पहुंचने में करीब तीन टन कोयले और 56 सौ लीटर पानी की खपत हुई।
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‘ट्रेवल पलज इंडिया’ की ओर से आयोजित इस टूअर में यूनाइटेड किंगड्म के 31 सैलानियों ने शिरकत की। स्टीम इंजन की बुकिंग के एवज में रेलवे को 1.49 लाख रुपये चुकाए गए।
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मंगलवार सुबह साढे़ आठ बजे स्टीम इंजन हेरिटेज रेलवे स्टेशन शिमला के प्लेट फार्म नंबर एक पर पहुंचा। सैलानियों के लिए इंजन में फर्स्ट क्लास के दो वीआईपी कोच लगाए गए।
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कोच में सोफे की सीटें लगाई गई थीं ताकि हरी भरी वादियों, सुर्ख लाल रंग के बुरांस के फूलों से लदे पेड़ों और देवदार के घने जंगलों का नजारा सैलानी देख सकें।
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यूनाइटेड किंगडम के 31 सदस्यीय दल ने कोच में सवार होने से पहले स्टीम इंजन और रेलवे स्टेशन को अपने कैमरों में कैद किया। 9 बजकर 35 मिनट पर स्टीम इंजन शिमला से कैथलीघाट को रवाना हुआ। देर शाम पांच बजे स्टीम इंजन वापस शिमला पहुंचा।
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यूनाइटेड किंगडम के 31 सदस्यीय दल ने कोच में सवार होने से पहले स्टीम इंजन और रेलवे स्टेशन को अपने कैमरों में कैद किया। 9 बजकर 35 मिनट पर स्टीम इंजन शिमला से कैथलीघाट को रवाना हुआ। देर शाम पांच बजे स्टीम इंजन वापस शिमला पहुंचा।
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शिमला से कैथलीघाट तक स्टीम इंजन के टूअर का आयोजन ‘ट्रेवल पलज इंडिया’ की ओर से किया गया। ‘ट्रेवल पलज इंडिया’ के डायरेक्टर अमित चोपड़ा ने बताया कि टूअर को ‘ट्रेवल पलज मैजिक ग्रुप’ नाम दिया था। टूअर में यूके के सैलानियों ने भाग लिया। शिमला से पहले सैलानियों ने दार्जिलिंग की भी सैर की।
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विदेशी सैलानियों के दल ने शिमला से कैथलीघाट तक 22 किलोमीटर स्टीम इंजन में सफर के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये चुकाए। स्टीम इंजन में लगे दो वीआईपी कोचों में 31 यात्रियों ने सफर किया। सैलानी सोमवार को कालका से शिमला रेल मोटर कार में आए थे। दो रेल मोटर कारें 47200 रुपये में बुक की थीं।
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रेल का पर्याय मानी जाने वाली छुक-छुक की आवाज सिर्फ स्टीम इंजन से पैदा होती है। स्टीम इंजन में भाप के पिस्टन में आगे पीछे चलने और बाहर निकलने से छुक-छुक की आवाज निकलती है। स्टीम इंजन में सीटी भी भाप के दबाव से बजती है। डीजल इंजन के मुकाबले स्टीम इंजन की सीटी ज्यादा तीखी और दूर तक सुनाई देने वाली होती है। इंजन में लाइट भी स्टीम से ही जलती है।
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1903 में बिछाई 96 किलोमीटर कालका-शिमला रेल लाइन में 102 सुरंगें, 800 पुल, 919 मोड़ और 18 रेलवे स्टेशन हैं। समुद्र तल से ट्रैक की ऊंचाई 2800 फुट से लेकर 7 हजार फुट तक है।