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बेटी बचाने को एक साथ नाचीं 10 हजार से अधिक महिलाएं

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देव महाकुंभ में बेटियों को बचाने के लिए दस हजार से अधिक महिला और पुरुष एक साथ नाचे। कार्यक्रम के देश विदेश के हजारों लोग गवाह बने। प्राइड ऑफ कुल्लू के नाम से आयोजित इन नाटी को पिछले साल ही लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में स्थान मिल चुका है। फोटो: अजय कुमार
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इस बार इस आयोजन की दावेदारी गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए की गई है। पूरी नाटी का आयोजन गिनीज बुक के कार्यालय से मिली गाइड लाइन के अनुसार किया गया।
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महिलाओं ने पारंपरिक कुल्लवी परिधानों में न केवल सामूहिक नृत्य किया बल्कि बेटी बचाने के लिए शपथ भी ली। यह आयोजन जहां एक ओर वर्ल्ड रिकार्ड बनाने की दहलीज पर है वहीं इससे समाज में एक संदेश देने का भी प्रयास किया गया है।

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इस बार 13 हजार से अधिक महिलाओं के पंजीकरण का प्रशासन दावा कर रहा था लेकिन 10 हजार से अधिक महिला और पुरुष नाटी में भाग लेने पहुंच पाए।
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ढालपुर स्थित रथ ग्राउंड और मोनाल होटल के बाहर वाले ग्राउंड में तिल धरने की जगह नहीं थी।
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अठारह करडू की सोह ढालपुर मैदान में देवताओं की मौजूदगी में हुए इस आयोजन में रंग बिरंगे परिधानों में 15 साल से लेकर 65-70 साल तक की महिलाओं ने भाग लिया।
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मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं आयुर्वेद मंत्री कर्ण सिंह ने कहा कि बेटी को बचाने की कुल्लू में यह एक बेहतर पहल है। इससे पहले कार्यक्रम के शुभारंभ पर महिलाओं ने रंग बिरंगे गुब्बारे छोड़ कर बेटी बचाने का संदेश दिया। इस मौके पर परिवहन मंत्री जीएस बाली, डॉ. शिविनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

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ग्राउंड में नाटी के आयोजन के लिए चार ब्लाक बनाए गए थे। जहां महिलाओं की एंट्री बार कोड के आधार पर हुई। सभी गेट पर कंप्यूटर लगे थे। जहां महिलाओं के बार कोड एंटर कर उन्हें नाटी ग्राउंड में प्रवेश दिया गया।

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नाटी के आयोजन के दौरान सभी महिलाओं को एक तय लाइन पर नृत्य करना था। लेकिन इस दौरान महिलाएं एक लाइन से भटक गई। वह लाइनों के बाहर नृत्य करने लगीं। जबकि गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड कार्यालय से मिली गाइड लाइन के अनुसार उक्त लाइन पर ही नृत्य करना था। ऐसे में रिकॉर्ड के रास्ते में यह कुछ बाधा बना सकता है।
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इस मौके पर नाटी किंग ठाकुर दास राठी, धर्मेंद्र शर्मा, कृष्णा ठाकुर, सरला चंबयाल, नरेंद्र ठाकुर, गोपाल शर्मा, करतार कौशल, हेम राज सहित अन्य कलाकारों के गानों पर नाटी का आयोजन किया गया।
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