रोशन कर रहीं उम्मीद के चिराग
जीपीजीआई का मैटरनिटी रिप्रोडक्टिव हेल्थ डिपार्टमेंट कई मायने में अनूठा। यहां से इलाज कराकर लौटे मरीजों से पूछिए तो कहते हैं कि यह जगह उनके लिए मंदिर से कम नहीं। निराश हो चुके कई लोगों के आंगन की किलकारियां यहां के डॉक्टरों की टीम की बदौलत है। विभाग की प्रमुख डॉ. मंदाकिनी प्रधान कहती हैं कि हम कुछ कर पाते हैं, क्योंकि हमारे साथ समर्पित और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम है। डॉ. नीता, डॉ. संगीता, डॉ. श्रुति जैन, डॉ. श्रुति, डॉ. सिद्धिदात्री, डॉ. इंदु, डॉ. अश्मिना, डॉ. गार्गी, डॉ. विभा, डॉ. लिपि व डॉ. भूमिका पूरी तरह से मरीजों के प्रति समर्पित हैं। यहां की विशेषज्ञ डॉक्टरों को तमाम जटिलताओं के बीच भी गर्भ में पल रहे भ्रूूण की जिन्दगी बचाने के लिए जाना जाता है। डॉ. मंदाकिनी को अपनी टीम पर गर्व है। कहती हैं कि हमारी टीम एक दूसरे को पढ़ लेती है। भ्रूण में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान मुझे बोलने की जरूरत नहीं पड़ती, उस वक्त एक-एक सेकंड महत्वपूर्ण होता है, ये लोग पल-पल के हिसाब से काम करती हैं। उनके डिसीजन पर मुझे भी शक नहीं होता। हाल ही में फॉग्सी की जेनेटिक एंड फीटल कमेटी की चेयरपर्सन बनीं डॉ. प्रधान बताती हैं कि हमारा तालमेल सिर्फ विभाग में ही नहीं, बल्कि अन्य विभागों के साथ भी बेहतर है। सीवीटीएस, इंडोक्राइन सर्जरी या अन्य। हम कोऑर्डिनेट कर बेहतर तरीके से काम करते हैं। विभाग की उपलब्धि के बारे में वे कहती हैं कि यहां से ट्रेंड डॉक्टर कई जगह अपना बेहतर दे रहे हैं और उन्हें विशेषज्ञ रूप में सभी ने स्वीकार किया है। हमने ही यहां पहली बार भ्रूण में ब्लड ट्रांसफ्यूजन शुरू किया। विश्व के सबसे छोटे भ्रूण में ट्रांसफ्यूजन का रिकॉर्ड भी इसी टीम के नाम है।
एसजीपीजीआई : मैटरनल रिप्रोडक्टिव हेल्थ डिपार्टमेंट
डॉ. मंदाकिनी प्रधान, डॉ. नीता, डॉ. संगीता, डॉ. श्रुति जैन, डॉ. श्रुति, डॉ. सिद्धिदात्री, डॉ. अश्मिना, डॉ. गार्गी, डॉ. विभा, डॉ. लिपि, डॉ. इंदु व डॉ. भूमिका।