करियर के तौर पर उनके जीवन में उस समय मोड़ आया जब 1976 में नेशनल स्कूल गेम्स के दौरान पीटी उषा के कोच ओ. एम. नाम्बियार की उन पर नजर पड़ी। इसके बाद पीटी उषा की अंतरराष्ट्रीय खेलों में शामिल होने का मौका मिला। 1980 में पीटी उषा के अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत हुई, जब कराची में पाकिस्तान ओपन नेशनल मीट में पीटी उषा ने चार स्वर्ण पदक जीते।
उसके बाद पीटी उषा तीन ओलंपिक खेलों मॉस्को (1980), लॉस एंजिल्स (1984) और सियोल (1988) में शामिल हुईं लेकिन पदक पाने से चूक गईं। लाॅस एंजिल्स ओलंपिक के फाइनल तक पहुंचीं। देश के लिए यह बड़ी उपलब्धि थी। उनसे पहले कोई भारतीय महिला एथलीट ओलंपिक फाइनल में नहीं पहुंची थी। पीटी उषा ने एशियाई खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। साल 1991 में पीटी उषा ने वी श्रीनिवासन से शादी की। कुछ साल ब्रेक के बाद 1998 में एथलेटिक्स में फिर से वापसी की।
पीटी उषा के पदक
महज 20 साल की उम्र में पीटी उषा को अर्जुन पुरस्कार, पद्म श्री से सम्मानित किया गया। इसके अलावा विश्व ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। भारतीय ओलंपिक संघ ने भी पीटी उषा को 'स्पोर्ट्स पर्सन ऑफ द सेंचुरी' और 'स्पोर्ट्स वुमन ऑफ द मिलेनियम' के लिए नामित किया था। साल 2000 में भारत की इस सर्वश्रेष्ठ एथलीट ने करियर से संन्यास ले लिया।