आईएएस की नौकरी छोड़ने के बाद अरुणा ने राजस्थान में सोशल वर्क एंड रिसर्च सेंटर में काम करना शुरू किया। इस संस्था की स्थापना अरुणा के पति संजित बंकर ने की थी। 1983 में पति से अलगाव होने तक अरुणा ने इसी संस्था के साथ काम करने हुए गरीबों के लिए प्रयास किया। बाद में राजस्थान के ही एक गांव में आकर काम करने लगीं। अपने साथियों के साथ मिलकर उन्होंने मजदूर किसान शक्ति संगठन की स्थापना की। यह गैर राजनीतिक जन संगठन मजदूर और गांव के किसानों के लिए काम करती थी।
सूचना का अधिकार लागू करवाने में योगदान
1992 में राजस्थान की भंवरी देवी के बलात्कार मामले के बाद अरुणा राय ने बीस महिलाओं और मानव अधिकार संगठनों के समूह के साथ मिलकर जयपुर में बड़ा प्रदर्शन किया। वह गांव वालों के साथ रहकर ही उनकी समस्याओं के लिए काम करती थीं और लोगों को सवाल पूछने के लिए प्रेरित करती थीं। एक रैली के दौरान अरुणा राय ने राज्य सरकार को बाध्य किया कि वह विकास फंड रिकॉर्ड जनता के सामने रखें। उनकी पहल से राजस्थान समेत तीन अन्य राज्यों में सूचना का अधिकार कानून पास हो गया।
अरुणा राय के पुरस्कार
सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय के योगदान के लिये उन्हें मैग्सेसे पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा अरुणा राय को मेवाड़ सेवाश्री समेत कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित भी किया जा चुका है।