फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chaitra Navratri 2023: भारत की समाजसेवी महिलाएं, जो दूसरों की मदद के लिए हमेशा रहीं तत्पर

Mon, 20 Mar 2023 04:35 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
मददगार महिलाएं - फोटो : istock
Chaitra Navratri 2023 Female Social Worker: मां दुर्गा के सभी स्वरूपों का अपना महत्व है। सबके अलग नाम और पहचान है। लेकिन नवदुर्गा की एक समानता है, सभी अपने बच्चों या भक्तों के लिए अपने स्वरूप में आती हैं। लोगों की मदद के लिए माता दुर्गा एक नए स्वरूप में अवतरित होती हैं। कभी बालक के पोषण के लिए माता अन्नपूर्णा बन जाती हैं तो कभी  ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती के रूप धारण कर लेती हैं। दुष्टों और दैत्यों से धरती व स्वर्ग की रक्षा के लिए महाकाली और दुर्गा बन जाती हैं। कह सकते हैं काम एक और रूप अनेक। भारतीय नारी में भी नवदुर्गा का ही रूप है। देश में ऐसी कई महिलाएं हैं जो दूसरों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहती हैं। जरूरतमंदों व असहायों की मदद के लिए कई महिलाओं ने अपना योगदान दिया। वर्तमान में इन महिलाओं को समाज सेविका का दर्जा दिया जाता है। चैत्र नवरात्रि के मौके पर जानें लोगों का मदद करने वाली भारतीय महिलाओं के बारे में।
 
विज्ञापन

2 of 6
मदर टेरेसा - फोटो : Facebook/The New Vision
मदर टेरेसा

जगत जननी मां पार्वती का कल्याणकारी स्वरूप है। माता के इसी रूप का प्रतीक मदर टेरेसा को माना जाता है। मदर टेरेसा ने बहुत कम उम्र में अपना लक्ष्य तय कर लिया था। मानव सेवा को अपना लक्ष्य बनाते हुए मदर टेरेसा ने अपना घर और देश छोड़ दिया और दूसरे कई देशों की यात्रा की। अल्बानिया से आयरलैंड तक और फिर 1929 में भारत आ गईं। भारतीयों की मदद के लिए अपना जीवन बिता दिया। उन्होंने भारत की नागरिकता ले ली और यहीं बस गई, ताकि देश में रहकर देशवासियों की सहायता कर सकें।
विज्ञापन

3 of 6
सिंधुताई सपकाल - फोटो : instagram/vinaysindhutai
सिंधुताई सपकाल

महाराष्ट्र की मदर टेरेसा बन चुकी सिंधुताई सपकाल ने 1400 बच्चों को सहारा दिया। ये बच्चे रेलवे स्टेशन, फुटपाथ पर बैठने वाले अनाथ व बेसहारा थे। सिंधुताई ऐसे अनाथ बच्चों की मां बनी। बच्चों के पालन पोषण के लिए उनके पास आमदनी नहीं थी, तो सड़को पर उतरकर भीख तक मांगी।

4 of 6
बसंती देवी - फोटो : facebook
बसंती देवी

लोगों के जीवन को सुरक्षित और एक अच्छा वातावरण देने के लिए बसंती देवी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अतुलनीय योगदान दिया।उत्तराखंड की कोसी नद को बचाने, समाज में फैली कुरीतियों जैसा घरेलू हिंसा, महिला उत्पीड़न को दूर करने के लिए बसंती देवी में महिला समूहों का आह्वान किया। जंगलों को बचाने के लिए मुहिम चलाई।
विज्ञापन

5 of 6
अरुणा राय - फोटो : facebook
अरुणा राय

राजस्थान के गरीब लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अरुणा राय ने काफी प्रयास किया। उन्होंने सूचना का अधिकार लागू कराने के लिए आंदोलन किया। रोजगार गारंटी और सूचना का अधिकार कानून बनाने में अरुणा राय की भूमिका अहम रही। मजदूर किसानों के जीवन को आसान बनाने के लिए संगठन की स्थापना की।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
सुनीता नारायण - फोटो : facebook/SunitaNarain
सुनीता नारायण

समाज को सुधारने और रहने योग्य बनाने के लिए पर्यावरणविद सुनीता नारायण ने लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक करने का प्रयास किया। कई मुहिम चलाई। उनके योगदान के लिए ब्रिटेन की सिटी ऑफ ईडनबर्ग काउंसिल ने सुनीता नारायण को 'ईडनबर्ग मेडल 2020 से सम्मानित किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें