latika chakravorty
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उन्होंने सोचा कि क्यों न फिर से सिलाई शुरू की जाए। दो साल पहले ही लतिका ने छोटे-छोटे पोटली बैग बनाने शुरू किए। इस छोटे बैग की खासियत ये होती कि इन्हें पुराने कपड़ों जैसे साड़ियां, कुर्तों से बनाया जाता है। ये बैग जरूरत में तो काम आते ही हैं साथ ही इसे एथनिक कपड़ों के साथ एक्सेसरीज के साथ भी रखा जा सकता है। पहले लतिका ऐसे बैग्स बनाकर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को देती थीं। लतिका की ऑनलाइन साइट उनके पोते जॉय चक्रवर्ती का आइडिया था जिसने अपनी दादी के हाथों की कलात्मकता को और भी लोगों तक पहुंचाने के बारे में सोचा। जॉय फिलहाल जर्मनी में रहते हैं, लेकिन अपने पैरेंट्स के पास अक्सर भारत आते रहते हैं। लतिका अपनी प्रेरणा और काम के पीछे की लगन के बारे में बात करते हुए कहती हैं, 'मैंने अपना जीवन काफी अनुशासित तरीके से जिया है। इससे मुझे काफी सुकून मिलता है।' वह कहती हैं कि उन्हें जल्दी सो जाना और जल्दी उठना पसंद है। शायद यही उनके स्वस्थ्य रहने का राज भी है।