राम... जिनमें संपूर्ण सृष्टि समाहित है। अयोध्या में उनके भव्य मंदिर के लोकार्पण और अचल मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर बरेली में चहुंओर उल्लास है। हर कोई इस ऐतिहासिक पल को अविस्मरणीय बना लेना चाह रहा है। वातावरण कुछ ऐसा बना है, जैसा अवधपुरी में प्रभु श्रीराम का प्राकट्य हुआ हो। ठीक वैसा ही, जैसा गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में लिखा है कि-
ध्वज पताक तोरन पुर छावा। कहि न जाइ जेहि भांति बनावा।।
सुमनवृष्टि अकास तें होई। ब्रह्मानंद मगन सब कोई।।
प्रभु श्रीराम के जन्म के समय पूरी अवधपुरी ध्वजा, पताका और तोरण से छा गई थी। आकाश से पुष्पवर्षा होने लगी थी। सभी लोग ब्रह्मानंद में मग्न हो गए थे। उस शोभा का वर्णन तुलसीदास जी भी नहीं कर सके थे। आज भी ठीक उसी तरह का वातावरण है