अरविंद सिंह मेवाड़
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महेन्द्र सिंह द्वारा संपत्ति के विवाद को कोर्ट तक ले जाने के बाद भगवत सिंह ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए 15 मई 1984 को अपनी वसीयत में छोटे बेटे अरविंद सिंह को संपत्तियों का एक्ज्यूक्यूटर बना दिया और महेंद्र सिंह को ट्रस्ट और संपत्ति से बेदखल कर दिया। दुर्भाग्यवश उसी साल भगवत सिंह का निधन हो गया। बस तब से ही ये विवाद चल रहा है, जिसने कभी महेन्द्र सिंह और अरविंद सिंह को एक नहीं होने दिया। समय के साथ साथ ये विवाद दोनों की संतानों के बीच भी गहरा गया। जिसमें महेन्द्र सिंह के बेटे विश्वराज सिंह और अरविन्द सिंह के बेटे लक्ष्यराज के बीच कभी नहीं बनी।