पांच हजार साल से भी ज्यादा पुराना है मंदिर
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राजा अंबरीश ने मां से इसी स्वरूप में यहां विराजमान रहने का वरदान मांगा, जिसके बाद से माता भद्रकाली कल्याणी रूप में यहां विराजमान होकर भक्तों का कल्याण कर रही हैं। इस मंदिर की विशेषता यह भी बताई जाती है कि यहां माता दो शेरों पर सवार हैं, जिसे अद्वितीय माना जाता है।