अरावली का महत्व
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पर्यावरणविदों की चेतावनी
राजस्थान के लिए यह मुद्दा इसलिए बड़ा है क्योंकि अरावली का सबसे ज्यादा हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है। अरावली की छोटी और मध्यम ऊंचाई की पहाड़ियां यहां वर्षा जल को रोकने, भूजल रिचार्ज, धूल भरी आंधियों को थामने और थार रेगिस्तान के फैलाव को रोकने में अहम भूमिका निभाती हैं। पर्यावरणविदों की चेतावनी है कि यदि ये पहाड़ियां संरक्षण से बाहर हुईं तो अलवर, जयपुर, दौसा, सीकर, झुंझुनूं, उदयपुर और राजसमंद जैसे जिलों में भूजल स्तर और नीचे जाएगा, सूखे की तीव्रता बढ़ेगी और खनन व अनियंत्रित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। पहले से ही जल-संकट से जूझ रहे राजस्थान के लिए यह स्थिति पर्यावरणीय के साथ-साथ आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संकट को जन्म दे सकती है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि यह लड़ाई केवल अदालत या सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी है। अरावली का नुकसान स्थायी हो सकता है, क्योंकि एक बार पहाड़ कटे और जलधाराएं टूटीं तो उन्हें वापस लाने में सदियां लग जाती हैं। इसी कारण जनजागरण और सवाल उठाना आज भविष्य को सुरक्षित करने की जरूरत बन गया है।