मंदिर परिसर में आरती के दौरान श्रद्धालु
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मेले के पहले दिन सोमवार सुबह 4 बजे मंगला आरती के बाद मंदिर के पट भक्तों के लिए खोल दिए गए। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त में 11:30 बजे से 12:30 बजे के बीच घट स्थापना की गई। परंपरा के अनुसार, पहले दिन जीणमाता ने शैलपुत्री स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए। मंदिर परिसर कोलकाता और दिल्ली से आए फूलों से सजाया गया, जबकि माता की पोशाकें जयपुर, हैदराबाद, पटना और बेंगलुरु से मंगाई गईं।