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Rajasthan: पूर्व राजपरिवार की राजमाता की अंतिम यात्रा गाजे-बाजे के साथ निकली, विधायक पौत्री ने दी मुखाग्नि

Sun, 12 Mar 2023 09:56 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

बीकानेर की अंतिम महारानी और पूर्व राजमाता सुशीला कुमारी का रविवार को अंतिम संस्कार किया गया। जूनागढ़ किले से राजमाता की अंतिम यात्रा निकली जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। राजपरिवार के रीति-रिवाज के तहत राजमाता को उनकी पौत्री ने मुखाग्नि दी।
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राजमाता सुशीला कुमारी की अंतिम यात्रा। - फोटो : सोशल मीडिया
राजस्थान के बीकानेर की अंतिम महारानी और पूर्व राजमाता सुशीला कुमारी रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गईं। राजमाता को उनकी पौत्री विधायक सिद्धि कुमारी ने मुखाग्नि दी। इससे पहले पूर्व राजमाता के पार्थिव देह को देवी कुंड सागर स्थित राज परिवार के विश्राम स्थल पर लाया गया। जहां राजघराने के रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया गया।  

शनिवार को राजमाता सुशीला देवी के निधन के बाद उनकी पार्थिव देह को जूनागढ़ किले में आम लोगों के दर्शन लिए रखा गया था। जहां हजारों लोगों, नेताओं और जन प्रतिनिधियों ने राजमाता के दर्शन किए। रविवार को किले से उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। राजमाता की अंतिम यात्रा पर लोगों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा की और उन्हें श्रद्धांजलि दी।  
 

पूर्व राजमाता के अंतिम यात्रा में शिक्षा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला, बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़, नोखा विधायक बिहारी लाल बिश्नोई, देवी सिंह भाटी सहित आदि नेता मौजूद रहे।
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अंतिम यात्रा में उमड़े हजारों लोग। - फोटो : सोशल मीडिया
राजमाता सुशीला कुमारी का पिछले कई साल से अस्वस्थ चल रहीं थी। उन्होंने ज्यादातर लोगों से मिलना बंद कर दिया था। वह अपने लाल लालगढ़ स्थित आवास में रहती थीं। शुक्रवार देर रात 94 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने आवास में अंतिम सांस ली थी।राजमाता सुशीला कुमारी का जन्म 1929 में  डूंगरपुर राजपरिवार में हुआ था। वे राजसिंह डूंगरपुर की बहन थी, उनका विवाह बीकानेर राजपरिवार में हुआ था। 
 
 
1950 में महाराजा सार्दुल सिंह के पुत्र राजकुमार करणी सिंह का राज्याभिषेक किया गया था। करणी सिंह के महाराजा बनने से सुशीला कुमारी को महारानी का सम्मान भी मिला था। वह करीब 1971 तक महारानी रहीं थी। 1988 में महाराजा करणी सिंह के निधन के बाद से सुशीला कुमारी ही राजपरिवार की सारी व्यवस्था संभालती रहीं थीं। लोगों ने उन्हें राजमाता के रूप में स्वीकार किया था।  
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विधायक पौत्री ने राजमाता को दी मुुखाग्नि। - फोटो : अमर उजाला
सुशीला कुमारी के बारे में कहा जाता है कि वे राजस्थानी भाषा को बहुत मानती थी। उनसे मिलने वाले राजस्थान के लोगों से वह इसी भाषा में बात करती थीं, राजस्थानी नहीं बोलने पर वह लोगों को टोक दिया करती थीं। बतादें कि महाराजा करणी सिंह 1952 से 1977 तक बीकानेर से सांसद रहे थे। अब उनकी पोती सिद्धि कुमारी विधायक हैं,  सिद्धि बीकानेर पूर्व विधानसभा सीट से पिछले तीन चुनाव में लगातार जीत दर्ज कर रही हैं। 
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