भाजपा नेताओं ने मुर्मू का भेंट की जयपुर के आराध्य गोविंददेवजी की तस्वीर।
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मुर्मू ने कहा कि एक राजस्थानी कहावत है कि 'अम्मर को तारो-हाथ से कौनी टूटे' मैं जहां से यहां तक आई हूं, इस कहावत की व्यवहारिकता को मैं समझती हूं। मेरी अब तक की जीवन यात्रा का अनुभव कहता है कि अनायास कुछ नहीं होता, हमारे आज के साथ बीते हुए कल के संघर्ष जुड़े हुए रहते हैं। संघर्ष हमें उद्देश्य और संकल्पों के प्रति सचेत रखते हैं।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अब सुरक्षित एवं विकसित होती व्यवस्था के मुख्य भागीदार बन रहे हैं। पिछले कई वर्षों में वंचितों, शोषितों और आदिवासियों के जीवन में उन्नति के साथ बड़े बदलाव आए हैं। विकास अब दूरस्थ क्षेत्रों तक बराबरी से पहुंच रहा है। स्वतंत्रता के बाद पहली बार आदिवासी समाज की एक बेटी को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाना, जिसका सबसे जीवंत उदाहरण है, जो देश के सभी आदिवासी भाई-बहनों का सम्मान है।